औरैया। यमुना नदी के शेरगढ़ घाट पर जलधारा में कई शव बहने और अधजले शवों को कुत्तों के नोंचने से हड़कंप मच गया है। लोग इस तरह शव बहाने से बीमारी का खतरा और बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। वहीं गुरुवार को प्रशासन की ओर से नदी व घाट के आसपास बहते दिखाई दिए। शवों को धकेल कर बीच धारा तक पहुंचाने की कोशिश की गई। इधर गुरुवार से घाट पर साफ सफाई कराने के साथ ही प्रशासन ने अधजले शव बहाने पर रोक लगने के बाद सख्ती दिखानी शुरू कर दी है।
कोरोना महामारी के दौर में श्मशान घाट के हालात सबसे ज्यादा खराब है। औरैया के शेरगढ़ घाट पर प्रतिदिन दर्जनों शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है। इनमें से कई ऐसे शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है, जो काफी दिन से बुखार से पीड़ित थे और उनमें कोरोना जैसे लक्षण थे। समय से इलाज नहीं मिलने पर उनकी मौत हो गई। इनमें वृद्ध, जवान और महिलाएं भी हैं। घाट के पुरोहित का कहना है कि मना करने के बाद भी लोग अधजले शव पानी में बहा कर चले जाते हैं।
कुछ परिवार संक्रमण का खतरा होने की वजह से सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। वहीं अविवाहित और बच्चों के शवों को बिना दाह संस्कार किए बहा रहे हैं। इसके अलावा आस पास के कई शव बह कर आ जाते हैं। इससे सही अंदाजा नहीं लग पा रहा है कि कौन से शव कहां के है। हकीकत तो यह है कि यमुना नदी में एक दो नहीं कई शव बहकर आए हैं। जिसमें कुछ पूरे है तो कुछ कई टुकड़ों में दिखाई दे रहे हैं।
महिला के शव के साथ कई शवों के अवशेष बहते मिले
गुरुवार को यमुना नदी घाट पर एक महिला का शव बहता मिला। महिला के शरीर पर पूरे कपड़े थे, शव कई दिन पुराना था। साथ ही घाट के किनारे के हिस्से में एक दो नहीं कई ऐसे शव पड़े थे जो अधजले थे और लोथड़े के रूप में बहते नजर आए। इनमें से कुछ शव कम उम्र के लोगों के दिख रहे थे। घाट पर मौजूद मछली का शिकार करने वाले कुछ लोगों ने बताया कि घाट किनारे बहने वाले अधिकतर शव स्थानीय है। जो लोग बिना जलाए बहा देते है, उन्हें यमुना की मछलियां और अन्य जानवर नोंचते रहते हैं।
शवों को बीच धारा में धकेल देते हैं कर्मी
शेरगढ़ घाट पर यमुना नदी में बह रहे शव घाट के किनारे तक आ जाते थे। इसकी जानकारी होने पर प्रशासन ने गुरुवार को सख्ती दिखाई। घाट पर एक व्यक्ति फावड़े से कुछ अवशेषों को हटाता रहा। वहीं एक व्यक्ति ने एक डंडे के सहारे घाट के किनारे शवों को बीच धारा में धकेल दिया। पूछे जाने पर व्यक्ति ने अपना नाम नहीं बताया और कहा कि उसे प्रशासन की तरफ से भेजा गया है। उसे जो काम बताया गया है सिर्फ वह करने आया है। शव किनारे से बीच धारा में करना है जो कर रहे हैं। वहीं उसने बताया कि वह पहले से यहां साफ सफाई के लिए आता जाता रहता है, एक सप्ताह पहले 30-40 शवों का रोज अंतिम संस्कार हो रहा था। इसमें से दर्जनों लोग अधजले शव जल्दबाजी में बहाकर चले जाते थे।