बिधूना (औरैया)। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मंगलवार को ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई के सीएमओ, तत्कालीन उपनिरीक्षक समेत तीन के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की है।
बिधूना निवासी एक पिता ने इन पर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर बेटे को जेल भिजवाने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि उनका बेटा पिछले 18 माह से इटावा जेल में बंद है।
बिधूना के फीडर रोड निवासी देवेंद्र सिंह यादव ने कुछ माह पहले कोर्ट में एक वाद दायर किया था। इसमें बताया गया था कि 19 जून 2023 को उनके परिजनों व उन पर बिधूना थाने में एक मुकदमा दर्ज हुआ था। तत्कालीन उपनिरीक्षक बिधूना भोला रस्तोगी ने मामले की विवेचना की थी।
इसमें भोला रस्तोगी ने उनके बेटे अश्वनी यादव के खिलाफ एक मामले में मारपीट, जानलेवा हमला व अन्य परिजनों पर मारपीट करने का आरोप पत्र 19 नवंबर 2023 में कोर्ट में दाखिल किया था। जहां से उनके बेटे अश्वनी को जेल भेज दिया गया था।
उनका आरोप है कि ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैंफई इटावा के सीएमओ विवेक चौधरी, बिधूना के तत्कालीन वरिष्ठ उपनिरीक्षक भोला प्रसाद रस्तोगी और बिधूना निवासी रामनरेश ने मिलकर उनके बेटे अश्वनी को फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्य तैयार कर फंसाया था।
उनका कहना है कि चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट में भी विरोधाभास है। आरोपियों ने जानबूझकर गलत रिपोर्ट तैयार की। इससे उनका बेटा बीते 18 महीने से जेल में बंद है। आरोप है कि सीएमओ न्यूरो सर्जन नहीं हैं, फिर भी वह एक ही पर्चे पर अवधि समाप्त होने के बाद भी दो महीने तक लगातार इलाज करना दर्शाते रहे। चिकित्सक के खिलाफ पहले भी कई व्यक्तियों ने गलत रिपोर्ट बनाने की शिकायतें की हैं।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि 10 जून 2024 को आरोपियों की एसपी औरैया, निदेशक ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई व स्वास्थ्य मंत्री से डाक के माध्यम से शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थानाध्यक्ष मुकेश बाबू चौहान ने बताया कि आरोपियों पर कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की जांच निरीक्षक जितेंद्र पाल सिंह कर रहे हैं।
जो विवेचना की गई उसका न्यायालय में देंगे जवाब : भोला रस्तोगी
इस मामले में तत्कालीन उपनिरीक्षक भोला रस्तोगी ने फोन पर बताया कि जिस मामले में रिपोर्ट बिधूना में दर्ज हुई है। उस मामले में मुकदमे की जांच कर रहे पहले विवेचक ने बिना बयान के धारा हटाई और नाम निकाला। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट सैफई से मंगाकर दस्तावेज (सीडी) में दर्ज की थी। इसके बाद मुकदमे की जांच उन्हें मिली थी।
दस्तावेज में लगी मेडिकल रिपोर्ट के आधार व वादी और गवाहों के बयानों के तहत नाम की बढ़ोतरी करते हुए धारा की भी बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद तत्कालीन कोतवाली प्रभारी श्रीकेश भारती ने आरोपी युवक की गिरफ्तारी करते हुए आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। उनके द्वारा जो विवेचना की गई उसका जवाब न्यायालय में दिया जाएगा।