औरैया। जालौन रोड के जिस मकान से पुलिस ने नकली खाद पकड़ी है, उसके शटर पर भवन किराये पर देने का इश्तिहार लिखा है।
अंदर हॉल और बेसमेंट में नकली खाद का कारोबार चल रहा था। यह बात तब सामने आई जब पुलिस ने मकान मालिक से जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि खानपुर निवासी युवक से एक माह पहले मकान किराये पर लिया गया था।
मामले में कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार प्रकाश चौधरी ने शुक्रवार की रात भवन को सील कर दिया था। शनिवार की सुबह पुलिस व प्रशासनिक अफसर पहुंचे। इसके बाद भवन की सील तोड़कर टीम अंदर गई।
नकली खाद की बोरियों का आकलन किया गया। टीम के अनुसार, मकान के हॉल में नकली डीएपी खाद का सामान रखा था। बेसमेंट में असली खाद की हूबहू बोरियों में नकली खाद की पैकिंग पाई गई। भवन के अंदर हॉल से बेसमेंट में जाने के लिए सीढि़यां मिली हैं।
अफसरों के मुताबिक रात के समय ट्रक व डंपर से नकली खाद को लाया जाता था। हॉल में नकली खाद को रख दिया जाता था। इसके बाद कानपुर से लाई गईं असली खाद की बोरियों में पैकिंग होती थी। पैकिंग बेसमेंट में कराई जाती थी।
यह सब पिछले एक माह से चल रहा था। ऐसे में बड़े पैमाने पर जिले में नकली खाद खपाए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अफसर कुल कितनी नकली खाद जिले में खपाई जा चुकी है, इसकी सही स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाए।
जरा सा रगड़ने पर टूट रहा दाना, चूने का पानी डालने पर नहीं आ रही बदबू
औरैया। डीएपी खाद नकली है या असली, इसके लिए पुलिस ने कृषि विभाग को सूचना दी। जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने पहले एक बोरी को खोलकर फर्श पर रखा। पैरों से रगड़ने पर आसानी से दाने महीन हो गए। उन्होंने चूने का पानी मंगवाया, फिर पानी में नकली खाद डाली।
कृषि अधिकारी के मुताबिक यदि डीएपी खाद असली होती तो चूने के पानी के संपर्क में आते ही गैस बनती, इससे तीक्ष्ण बदबू आती है, लेकिन बदबू नहीं आई। इसके बाद पुष्टि हो गई कि पकड़ी गई खाद नकली है।
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि खाद नकली है। पैरों से रगड़ने पर यह आसानी से महीन हो जा रही है। जबकि असली डीएपी खाद के दाने मिट्टी व नमी के संपर्क में आने पर घुलते हैं। उन्हें आसानी से नहीं पीसा जा सकता। साथ ही चूने के पानी के संपर्क में लाने पर तीक्ष्ण बदबू नहीं आ रही है। सूंघने पर नाइट्रोजन की महक नहीं आ रही है। फिलहाल यह फौरी जांच है। प्रयोगशाला से स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।।
आलू व सरसों की बुवाई के दौरान बड़े पैमाने पर नकली खाद खपाने की थी तैयारी
कृषि विभाग के अनुसार धान के शुरुआती सीजन में ही डीएपी की जरूरत होती है। इस नकली डीएपी खाद को जुटाया जा रहा था। इसकी तैयारी आगामी आलू व सरसों की फसल की बुवाई के लिए की जा रही थी। इनका सीजन 15 सितंबर से शुरू होना है। आलू व सरसों में बहुतायत में डीएपी खाद की खपत होती है। औरैया जिले में आलू व सरसों का रकबा अच्छा खासा है। ऐसे में नकली डीएपी को खपाने के लिए फुटकर दुकानदारों और किसानों से संपर्क किया जा रहा था।