हम तो तबाह हो गए : मुरादाबाद में दिल्ली रोड के निकट गांगन के पास बिछी गेहूं की फसल को देखकर रोता किसान। शनिवार हुई बरसात ने गेहूं और दूसरी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है।
- फोटो : मोहम्मद सैफ अली खान (अमर उजाला)
खरीफ सत्र 2015-16 में धान, बाजरा की फसलों का बीमा कराने वाले जिले के किसानों को फसली नुकसान का मुआवजा अभी तक नहीं मिल पाया है। जबकि बीमा कंपनी ने 10 अप्रैल को छह करोड़ रुपये मुआवजा जारी करने की बात कही थी। मामले में बीमा कंपनी के बाद अब जिला स्तर पर ढिलाई बरती जा रही है। फसल बर्बादी के छह माह बाद भी धनराशि अभी तक बैंकों के पास नहीं पहुंची है।
फसली बीमा योजना के तहत खरीफ सत्र 2015-16 में जिले के 25605 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया था। बीमा के बदले किसानों से प्रीमियम काटकर बैंकों ने अनुबंधित बीमा कंपनी आईसीआईसीआई-लोंबार्ड के बैंक एकाउंट में 2.74 लाख रुपये की धनराशि पहुंचाई थी। खरीफ सत्र में कमजोर मानसून के चलते धान, बाजरा की फसलें सूखे की भेंट चढ़ गईं थीं। जिला स्तर कराए गए सत्यापन के बाद अनुबंधित बीमा कंपनी ने कुल बीमित 25605 किसानों के सापेक्ष 9937 किसानों को ही पात्र मानते हुए मुआवजा दिया।
बीमा कंपनी ने पात्र किसानों के सीधे खातों में मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए 10 अप्रैल को 6 करोड़ एक लाख 54 हजार 741 राशि जिले को उपलब्ध कराई जा चुकी है। लेकिन 18 दिन गुजरने के बाद भी जिला स्तर पर किसानों को दूर बीमा कराकर प्रीमियम राशि जमा कराने वालीं बैंकों तक को मुआवजे की धनराशि हस्तांतरित नहीं की गई है। मामले में अग्रणी जिला प्रबंधक दूधनाथ ने बताया कि अंतराल में पड़े अवकाशों के चलते फसली बीमा योजना की अनुबंधित बीमा कंपनी की ओर से प्राप्त कराई गई मुआवजा राशि बैंकों में हस्तानांतरित नहीं हो सकी है। बैंकों को उक्त राशि हस्तानांतरण की कार्रवाई शुरू कर दीर गई है। दो-एक रोज में सभी बैंकों को मुआवजा राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।