हरि को नयनों में बसा लेने से ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। भगवान की अनुकंपा होने पर जीव पूर्ण रूप भगवान को समर्पित हो जाता है। मीरा ने श्रीकृष्ण को अपनी आंखों में बसाया था, जिससे मीरा प्रत्येक जीव में भगवान का दर्शन पाती रहीं। यह आदर्श वचन आचार्य अंकुश तिवारी ने भक्तों के बीच दिए।
कस्बा बाबरपुर स्थित काली माता मंदिर में भक्तों को भागवत कथा का रसपान कराने वृंदावन धाम से पधारे बाल शुक्र आचार्य पंडित अंकुश तिवारी ने कहा कि एक बार पृथ्वी लोक के भ्रमण के दौरान नारद मुनि ने देखा कि एक वृद्ध महिला दो जवान बेटों के साथ बैठी हुई है।
पूछने पर मां ने बताया कि दोनों बेटे ज्ञान और वैराग्य है, जो कि कलयुग में निष्किय हो गए हैं, कोई उपाय बताएं, जिससे मानव जीव को ज्ञान और वैराग्य की ओर प्रेरित होकर भगवान की कृपा मिल जाए।
उन्होंने बताया कि मुक्ति पाने का सर्वश्रेष्ठ योनि मानव है, जो मानव भगवान के चरणों में भजन, भागवत कथा को सच्चे मन से सुनता है, उसे मोक्ष अवश्य मिलता है।
आचार्य ने भक्तों के बीच जब मन चला रे वृंदावन धाम... सुनाया तो भक्तगण भक्तिरस में सराबोर हो गए और झूमने को मजबूर हो गए। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।