गेहूं की फसल पर मामा, बथुआ और मटरिया किसानों की मुसीबत बना है। किसान दिन-रात खेतों से मामा को समेटने में लगा हुआ है तो वहीं मटरिया पौध की बाढ़ मार रही है। किसान फसलों के बचाव के लिए खेत में पानी भरने के साथ मामा, मटरिया बीनने में लगे हैं। गेहूं में कीट पर खरपतवार का प्रमुख कारण नमी व अत्याधिक तापमान माना जा रहा है। जरुलिया के किसान पप्पू शर्मा बताते हैं कि खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण न हुआ तो गेहूं की फसल भी आधी रह जाएगी।
मामा के लक्षण व बचाव के उपाय
गेहूं की पौध में गेहूं का रूप लिए मामा भी अपनी जगह बना लेता है। यह पू्री तरह से गेहूं की तरह होता है। इसमें बाली भी निकलती है। इसके बीज समय से पहले बिखरकर फसल को खराब कर देते हैं। मामा की पहचान उसकी जड़ से होती है। इसकी जड़ लाल होती है। किसान मामा की फसल से अपनी पौध को बचाने के लिए नीम का तेल 1500 पीपीएम दो मिली लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। इसके अलावा इसकी रोकथाम के लिए येल्लो स्टिकी ट्रैप का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें लालमिर्च पाउडर का घोल भी लाभकारी होगा।
मटरिया व बथुवा बचाव के उपाय
गेहूं के बीच में मटरिया खरपतवार भी अपना स्थान बना लेती है। इसकी बेल कई गेहूं की पौध से लिपट कर उसकी बाढ़ को प्रभावित कर सकती है। जमीन से पोषक तत्वों का अवशोषण कर गेहूं को बेजान कर देती है। जिससे गेहूं की बालियां पूरी तरह से फल नहीं पाती है। किसान भाई समय रहते ऐसे खरपतवार से मुक्ति पा ले। जिससे उसकी गेहूं की फसल सेहतमंद बनी रहे। किसान भाई बथुआ नियंत्रण के लिए मेट सल्फूरान मिथाइल का 20 प्रतिशत डब्लू की 8 ग्राम दवा को 500 लीटर पानी के घोल में प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। इसके साथ ही 75 फीसदी, डब्लू् पी की 75 फीसदी मात्रा को निर्धारित घोल में तैयार कर छिड़काव करें। छिड़काव करने से पूर्व कृषि वैज्ञानिकों की राय अवश्य लें।