आलू चटनी के साथ चर्चा करते बसपा प्रत्याशी रामकुमार अवस्थी
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विधानसभा चुनाव का मतदान होने के बाद सोमवार को प्रत्याशी और समर्थक कुछ अलग ही मूड में नजर आए। हालांकि प्रत्याशियों के घरों पर दिनभर कहीं चाय के साथ तो कहीं आलू-चटनी के साथ चुनावी चर्चा चली। वहीं समर्थकों ने अपना गणित बताकर अपने-अपने प्रत्याशियों को जीतता हुआ बताया।
सोमवार सुबह के आठ बजे। दिबियापुर विधानसभा सीट के भाजपा प्रत्याशी लाखन सिंह राजपूत के घर पर कार्यकर्ता पहुंच चुके हैं। लाखन सिंह राजपूत ने बताया कि वह रोज की तरह सुबह पांच बजे ही जागे थे। नहा धोकर अपने घर के बाहर स्थित कार्यालय में बैठे तो कार्यकर्ता आने लगे। यहां पर काफी देर तक चाय पीकर चुनावी चर्चा हुई। सभी ने विभिन्न पार्टियों से भाजपा की स्थिति को बेहतर बताया। कार्यकर्ताओं ने बताया कि अन्य पार्टियों से प्रत्येक बूथ पर उनकी स्थिति बेहतर रही। इसके बाद वह दिबियापुर में लोगों से मिले।
सपा प्रत्याशी विधायक प्रदीप यादव बिना नहाए ही दिबियापुर स्थित आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ से मिल रहे हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान बताती है कि वह अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। एक बुजुर्ग घुसते हैं तो विधायक झट से कुर्सी से उठकर उनके पैर छू लेते हैं। विधायक का पहला सवाल होता है। और चाचा तुम्हाये बूथ पे पार्टी की स्थिति का रही। बुजुर्ग भी बताते हैं अपईं पोलिंग पे तो पूरे दिन साइकिल खूबई दौड़ी। इस पर आश्वस्त हुए विधायक प्रदीप यादव उनसे बैठने के लिए कहते हैं। उनकी कुशलक्षेम पूछते हैं। उनका यह क्रम दोपहर के बाद तक चलता रहा।
लगभग 11 बजे हैं। बसपा प्रत्याशी रामकुमार अवस्थी घर से ग्राम जमुहां स्थित कैंप कार्यालय पहुंच चुके हैं। यहां पार्टी पदाधिकारियों हाजी अब्दुल कादरी एवं रामौतार पाल के साथ वह बूथों पर पार्टी की स्थिति की जानकारी ले रहे हैं। धीरे-धीरे पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ आने लगती है। इस बीच रामकुमार अपने कर्मचारियों से पार्टी के लोगों के लिए भुने आलू और चटनी का इंतजाम करने के लिए कहते हैं। अखबारों पर सरसरी निगाह के बाद बूथों पर बसपा की स्थिति के बारे में चर्चा होती है। पार्टी कार्यकर्ता बताते हैं कि अछल्दा में उनकी सपा से लड़ाई है।
इधर बिधूना विधानसभा से सपा के प्रत्याशी रोज की तरह ही सुबह उठे। नहा धोकर पत्नी एलिसा के साथ पूजा पाठ की और जीत की मन्नतें मांगी। इसके बाद अखबार पढ़कर मतदान का हाल लिया। इसी बीच घर में कार्यकर्ता धीरे-धीरे जमा हो रहे थे। अपने अपने गांव की रिपोर्ट दे रहे थे। सभी ने अपने अपने गांव के हाल बताया। कि हमाये गांव में कितने मिले और कितने विपक्षियों को। दिन भर गांव-गांव के कार्यकर्ता ऐसी ही गणित बताते रहे।