बिधुना थाने की पुलिस ने जनता के बीच अपनी छवि बदल दिया है। अपनी मानवीय संवेदना की बदौलत आज वह सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इस थाने के एक सिपाही और तत्कालीन सीओ ने अपनों से ठुकराई दो वृद्ध महिलाओं को थाने में शरण देकर मिसाल कायम की है। दोनों आज भी थाने के कर्मचारियों की देखरेख में हैं। दो वृद्ध महिलाओं में से एक सोनवती दो साल से तो दूसरी स्नेहलता करीब सात साल से बिधूना कोतवाली में जीवन यापन कर रही हैं।
सोनवती को साल 2014 में उनके बेटों ने मारपीट कर घर से निकाल दिया था। बेटों के जुल्म से परेशान और खून से लथपथ सोनवती कोतवाली बिधूना पहुंची और सुरक्षा की गुहार लगाई। तत्कालीन सीओ शिवराज सिंह के सामने वृद्धा फूट-फूट कर रो पड़ी। सीओ से उसका दर्द देखा न गया। उन्होंने सोनवती को शांत कराया और फिर उसकी पूरी बात सुनी। बेटों के उत्पीड़न की कहानी सुनाते सोनवती की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।
सीओ शिवराज सिंह ने बताया कि वह सोनवती के बताए पते पर पुलिस लेकर उसके घर गए। उसके बेटों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह उसे रखने को तैयार नहीं हुए। इधर शाम हो जाने के कारण वृद्घा सोनवती को कोतवाली परिसर में ही सीओ के कहने पर खाना खिलाया गया। उसे रात बिताने के लिए एक कोठरी दे दी गई। बेटों की मारपीट से डरी सोनवती घर जाने को भी तैयार न थी। वह घर जाने के बजाय आत्महत्या की बात कहने लगी।
यह सुनकर पुलिस कर्मी भी उसके प्रति द्रवित हो गए। उन्होंने सीओ शिवराज सिंह की अनुमति से उसे परिसर में ही रहने की जगह दे दी। बूढ़ी आंखें भी पुलिस कर्मियों का प्रेम देख छलक आईं। तब से वह उनके साथ ही कोतवाली में रह रही है। वहीं दूसरी वृद्धा स्नेहलता की मानसिक स्थिति सही नहीं है। लगभग सात साल पहलेे स्नेहलता रोते हुए कोतवाली आई थी। इसे भी पुलिस कर्मियों ने आश्रय दे दिया था।
अपनों ने कभी मुड़ कर नहीं देखा
बिधूना कोतवाल विक्रमाजीत ने बताया कि इन वृद्ध महिलाओं का उनके पुत्रों ने उत्पीड़न किया है। उन्हें मारपीट कर घर से निकाल दिया। खाना भी नहीं देते थे। महीनों से उन्हें कोई कोई देखने तक नहीं आया है। सोनवती के लड़के तो अब बताए गए पते पर रहते भी नहीं हैं।
दिन भर बेचैन रहीं वृद्ध महिलाएं
बिधूना थाने में शरण लिए दोनों वृद्धाएं इन दिनों कोतवाली की हलचल से हैरान हैं। शुक्रवार को किसी पुलिस कर्मी ने उन्हें घर भेजने की बात कह दी। इस बात से सहमी वृद्घाएं कई घंटे कोठरी से बाहर नहीं निकली। बीमार होने का सोच जब पुलिस कर्मियों ने कोठरी से अंदर झांक कर देखा तो वह डरी-सहमी नजर आईं। जिस पर पुलिस कर्मियों ने उन्हें वहीं पर रखे जाने का भरोसा दिलाया तो उन्होंने पुलिसकर्मियों के सिर पर हाथ फेर माथा चूम लिया।
रीयल हीरो को सलाम
प्रदेश स्तर पर बिधूना थाने की चर्चा ने पुलिस कर्मियों की सोच बदल दी है। अपराध खत्म करने के लिए उस कड़ी का हिस्सा बनना सबके बस की बात नहीं होती है। लेकिन बिधूना थाने के एक दीवान ने इसे नजीर बना दिया। दीवान सुरेश मिश्रा ने सोनकली को अपने घर में पनाह दी है। इसके साथ ही उन्हें खाने, कपड़े आदि से सहयोग किया। सुरेश मिश्रा कहते हैं कि देने वाला भगवान है। उसकी इच्छा से ही हम सब काम करते हैं। थाने में दानों वृद्ध महिलाएं परिवार की तरह रहती हैं। महीने की शुरुआत में सिपाही से लेकर कोतवाल तक की पगार में अम्मा के लिए कुछ न कुछ होता है। कोई अम्मा को साड़ी लाकर देता है तो कोई अम्मा के खाने का इंतजाम कर देता है।
डीजीपी करेंगे सीओ का सम्मान
बीते दिनों सीओ शिवराज सिंह वृद्धा सोनवती का हालचाल लेने बिधूना थाने पहुंचे। उन्होंने सोनवती की फोटो एक छोटी पोस्ट के साथ व्हाट्सएप पर डाल दी। पोस्ट चंद मिनट में वायरल हो गई। कई आईपीएस अफसरों ने इसे शेयर किया। आईपीएस एसोसिएशन ने पोस्ट को ट्वीट कर दिया। इसके बाद डीजीपी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सीओ शिवराज को सम्मानित करने का निर्णय लिया। डीजीपी के पीआरओ राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि सीओ ने समाज के सामने पुलिस के मानवीय चेहरे का उदाहरण पेश किया है। इसके लिए डीजीपी जावीद अहमद जल्द उन्हें ऑफिस बुलाकर सम्मानित करेंगे।