तापमान में उतार-चढ़ाव बैगन और पत्तागोभी की फसल पर आफत बनकर टूट रहा है। सब्जियों में झुलसा और फलीछेदक की मार से किसान परेशान हैं। सब्जी की पैदावार ले रहे जैतापुर, जरुलिया के किसान विनय कुमार, छुन्ना केवट कहते हैं कि मौसम न बदला तो दवा भी असर नहीं करेगी। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल पर प्रतिदिन नजर रखने की सलाह दी है।
बैंगन में लगने वाले रोग और उपाय
पत्ती धब्बा रोग : बैंगन में कवक की प्रजातियां पैदा होने से पत्तियों में धब्बा पड़ने लगता है। इससे धीरे-धीरे फल पीला पड़ने लगता है। चंद्रशेखर कृषि विवि के वैज्ञानिक डा. जितेंद्र कुमार ने बताया कि किसान खरपतवार की रोकथाम को नियमित प्रयास करें। रोगी पत्तियों को तोड़कर एक स्थान पर जला दें। डाइथेन जेड-78 या फ्लाइटोक्स आदी के 0.2 प्रतिशत घोल का 7-8 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। किसान बुवाई के समय बुनियादी बातों का ध्यान भी रखें।
सूड़ी रोग : डा. जितेंद्र कुमार ने बताया कि सूत्रकृमि की बैगन में अनेक प्रजातियां हमलावर होतीं है। इसके कारण पत्तियां पीली होकर लटक जाती हैं। फल में गलना रोग लग जाता है। यह पौध को 50 फीसदी तक नुकसान पहुंचा देते हैं। इसकी रोकथाम के लिए खेत मे नमी अधिक होने पर नीम की खली एवं लकड़ी का बुरादा 25 क्विंटल प्रति हेक्टयर की दर से भूमि में मिला दें। रोगी पौधों को उखाड़ कर जला दें।
पत्ता गोभी में लगने वाले रोग और उपाय
सूड़ी पत्तियों की निचली सतह को खाती हैं। इससे फल में छोटे-छोटे छिद्र हो जाते हैं। इनका प्रकोप अधिक होने पर छोटे पौधों की पत्तियां खत्म हो जाती हैं। इससे पौधे मर जाते हैं। इस कीट से फसल को बचाने के लिए 25 वर्ग मीटर गोभी की क्यारी के चारों तरफ मेड पर चीनी पत्तागोभी की बुवाई करें। कीट से बचाने के लिए डाईक्लोरोवास एक मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। चार प्रतिशत नीम की गिरी का निचोड़ फसल पर छिड़कने से इस कीट का प्रकोप कम हो जाता है। यदि कीट का प्रकोप ज्यादा बढ़ जाए तो हाइड्रो क्लोराइड का एक मिली लीटर प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।
वहीं पत्ता गोभी पर धब्बा रोग पत्तियों को सुखा देता है। यह छल्लेनुमा धब्बे के रूप में दिखाई देता है। यह पुष्पक्रम को नष्ट कर देते है। इससे पैदावर कम हो जाती है। इसकी रोकथाम के लिए क्लोरोथैलोनिल कवकनाशी के 0.2 प्रतिशत जलीय घोल को स्टीकर के साथ मिलाकर एक बार छिड़काव करना चाहिए। स्वस्थ पौधों से बीज का चुनाव करें। फली बनते समय मैंकोजेब का 0.25 प्रतिशत का प्रतिलीटर घोल का छिड़काव करें।