औरैया। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोप से संबंधित फौजदारी निगरानी याचिका को खारिज कर दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार वत्स ने मंगलवार को निचली अदालत (न्यायिक मजिस्ट्रेट) के इस आदेश को सही ठहराया है।
बिधूना कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने 14 जुलाई 2022 को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 24 मई 2022 की रात उसके देवर और ननदोई ने उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में विवेचना के दौरान पुलिस ने अभियुक्तों की मोबाइल लोकेशन घटना के समय मैनपुरी और फिरोजाबाद में पाई थी, जिसके चलते पुलिस ने अंतिम आख्या लगा दी थी। इसके बाद महिला ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया, जिसे अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज कर सुनवाई की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परिवादिनी और उसके गवाहों के बयानों में कई गंभीर विरोधाभास थे। तहरीर में महिला ने दोनों आरोपियों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था, जबकि दर्ज अपने बयान में उसने केवल देवर पर आरोप लगाया। महिला की मेडिकल रिपोर्ट में लैंगिक हिंसा की पुष्टि या शरीर पर किसी प्रकार की चोट के निशान नहीं पाए गए। घटना के बाद घर के पास मौजूद रहे परिचितों को महिला ने घटना की जानकारी नहीं दी और रिपोर्ट दर्ज कराने में भी लंबा समय लिया।
अपर सत्र न्यायाधीश ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि निचली अदालत का आदेश पूरी तरह से विधिसम्मत है। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामले में किसी को तलब करना एक गंभीर प्रक्रिया है और बिना ठोस साक्ष्यों के इसे शुरू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने परिवादिनी की निगरानी याचिका को बलहीन मानते हुए उसे निरस्त कर दिया और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।
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गवाह आरक्षी को तलब करने का आदेश
औरैया। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट की अदालत ने एक पुराने मामले में न्यायहित में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की अर्जी स्वीकार करते हुए आरक्षी मंशाराम को बतौर गवाह तलब करने का आदेश दिया।
साल 2010 में सदर कोतवाली में एनडीपीएस एक्ट के तहत कल्लू पाठक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। वर्तमान में यह सत्र वाद के रूप में न्यायालय में विचाराधीन है। अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया कि विवेचक की ओर से आरोपपत्र में आरक्षी मंशाराम का नाम गवाहों की सूची में शामिल नहीं किया गया था।
उन्होंने ही बरामद माल को एफएसएल आगरा में जमा कराया था और रसीद प्राप्त की थी। इसके अतिरिक्त मामले में एफआईआर वाले मुख्य आरक्षी रामचंद्र गौतम की मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में आरक्षी मंशाराम का बयान दर्ज किया जाना न्यायपूर्ण निर्णय के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश पारुल जैन ने बचाव पक्ष की सहमति और मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है। अब आरक्षी मंशाराम को समन भेजकर साक्ष्य के लिए बुलाया जाएगा और न्यायालय में उपस्थित होने पर उनका बयान दर्ज किया जाएगा। (संवाद)
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बहू की फौजदारी निगरानी खारिज, पीटने का चलेगा मुकदमा
औरैया। अपर सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बहू अंजू लता की ओर से दायर फौजदारी निगरानी याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सास विद्या देवी की ओर से दर्ज कराए गए परिवाद में बहू और उसके मायके वालों को तलब किया गया था। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
मामला सदर कोतवाली क्षेत्र का है। परिवादिनी विद्या देवी ने न्यायालय में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि दो मार्च 2022 को उनकी बहू अंजू लता, उनके मायके वाले विनोद कुमार, सोनू, अंशू और नीरज उनके घर आए थे। आरोप है कि सभी ने उनके बेटे अविनाश सिंह को पीटा और धमकी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर अंजू लता को दो लाख रुपये देकर रिश्ता खत्म नहीं किया गया, तो वे उसके बेटे को जिंदा नहीं छोड़ेंगे।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने साक्ष्यों के आधार पर अंजू लता व अन्य के खिलाफ धारा 323, 504, 506 और 452 के तहत तलब करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ अंजू लता ने अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष निगरानी याचिका दायर की थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि उन पर लगाए गए आरोप फर्जी और मनगढ़ंत हैं और पहले से चल रहे वैवाहिक विवादों के कारण उन पर दबाव बनाने के लिए यह मुकदमा किया गया है।
अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम राजीव कुमार वत्स ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान पाया कि निचली अदालत के आदेश में कोई विधिक त्रुटि नहीं है। अदालत ने निगरानी याचिका को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया और निचली अदालत के आदेश को पुष्ट किया है। (संवाद)