सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में कक्षा 8 की छात्रा नेहा कुशवाहा ने अपने अनूठे अभियान से जनपद के बढ़े-बूढों को भी विस्मित कर दिया है। पहले उसकी बातों को हल्के ढंग से लेने वाले ग्रामीण अब अभियान से जुड़ने के लिए तैयार है। नेहा ने ग्रामीणों को परंपराओं के बीच हरियाली लाने की मुहिम छेड़ी है।
बाल विज्ञान कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर चुकी नेहा का कहना है कि दाह संस्कार की रिक्त छोड़ी गई भूमि पर पौधरोपण कर हरियाली कायम की जा सकती है।
नेहा कुशवाहा बतातीं हैं कि इसी 7 मार्च से प्रारंभ किए गए सर्वे एवं जागरुकता अभियान में ग्रामीणों की मदद से सैकड़ों लोगों को पर्यावरण के लिए जागरुक कर चुकीं हैं।
वह बताती है कि गांव में किसी का देहांत होने पर अधिकतर लोग उनका अंतिम संस्कार अपने खेत के कोने पर स्थान बनाकर उस जमीन को खाली छोड़ देते हैं। हम ग्रामीणों को सलाह देते हैं कि वे इस खाली पड़ी जमीन पर अपनों की याद में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।
क्योंकि अंतिम संस्कार में लगभग 3 से 4 क्विंटल लकड़ी का प्रयोग होता है। इससे कार्बन डाई आक्साइड खासी मात्रा में उत्सर्जित होती है। जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी है।
इसके चलते हमें कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। पौधा लगाने से पर्यावरण संतुलन में हम मदद कर सकते हैं। नेहा के इस अभियान में जगमोहनपुर, ऐरवाकटरा भटपुरा, उमरेड़ी, हाजीपुर, प्रहलादपुर, भटौली, चंदौली आदि जैसे 24 गांवों के कई ग्रामीणों ने शामिल होने का वायदा किया है।
कक्षा आठ की छात्रा नेहा कुशवाहा सुनीता बिलियम्स की तरह अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहती है। उसने वायुदाब मापी यंत्र बनाया है। उनका यह यंत्र राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस बंगलौर में सम्मानित हो चुका है। एक फ्लास्क, गुब्बारे की मदद से बना यह वायु दाब मापी यंत्र के माध्यम से ताप के साथ बदलते वायुमंडलीय दाब का मापन कर चुकीं हैं।