मन में पाप, लोभ, मोह किसी के प्रति स्नेह पैदा नहीं कर सकता है। ऐसे लोग किसी की उन्नति नहीं देे सकते हैं, उसे नीचा गिराने के प्रयास में लगे रहते हैं। ऐसे लोगों का कभी भला नहीं हो सकता है। ईष्या उनको अंदर की अंदर खा जाती है। यह बात कथावाचक आचार्य आशुतोष अवस्थी ने कथा का रसपान कराते हुए कहीं।
कस्बे के विद्यानगर स्थित भटा रोड पर चल रही श्रीमद भागवत महापुराण कथा में कथा वाचक आचार्य पं. आशुतोष अवस्थी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना का वध कर उसका उद्धार किया था। राम ने अहिल्या का उद्धार किया। केवट का उद्धार किया। हम दौलत मिलने पर अपनों को भूल जाते हैं।
कहा कि धन, यश, वैभव मनुष्य को अपनों से दूर कर देता है। हम दूसरे के वैभव को देखकर जलते हैं, यही मनुष्य के पतन का कारण है। हमें दूसरों के खुशी में शरीक होने का हक है तो गरीब की मदद करने का भी हक है। हम समाज के हित की सोंचे तभी हमारा हित होगा।
कथा श्रवण के दौरान परीक्षित के रूप में जगत नारायण सक्सेना, गौरव गुर्जर, मदन गोपाल, पिन्टू सोनी, देवनारायण सक्सेना, आदि सैकड़ों लोग उपस्थिति रहे ।