औरैया। परिवार नियोजन स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसमें भी दो बच्चों के बीच अंतर रखने के लिए कई तरह के अस्थायी गर्भ निरोधक साधन लाभार्थियों की पसंद के मुताबिक उपलब्ध हैं। परिवार नियोजन अपनाने में औरैया जनपद को तीसरा स्थान मिला है।
इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत ही लॉकडाउन से हुई, फिर भी जिले की महिलाओं ने संस्थागत प्रसव के तुरंत बाद इस विधि को अपनाने में दिलचस्पी दिखाई। हेल्थ मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) के 12 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक फिरोजाबाद में 956 महिलाओं ने पीपीआईयूसीडी को अपनाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। औरैया को प्रदेश में तीसरा व फर्रुखाबाद को छठा स्थान मिला है। औरैया में 1356 संस्थागत प्रसव के मुकाबले 359 महिलाओं व फर्रुखाबाद में 2573 संस्थागत प्रसव के मुकाबले 629 महिलाओं ने पीपीआईयूसीडी अपनाया है।
क्या है पीपीआईयूसीडी
सीएमओ परिवार कल्याण डा. शशिबाला सिंह का कहना है कि पीपीआईयूसीडी लगवाने के बाद महिलाओं को किसी भी प्रकार की तकलीफ और नुकसान नहीं होता। एक बच्चा होने के बाद महिलाएं अगले बच्चे के जन्म में अंतराल रख सकती हैं। प्रसव के 48 घंटे के अंदर यानि अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले महिला आईयूसीडी लगवा सकती है। एक बार लगने के बाद इसका असर पांच से दस साल तक रहता है। बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने की यह लंबी अवधि की विधि बहुत ही सुरक्षित और आसान भी है। यह गर्भाशय के भीतर लगने वाला छोटा उपकरण है जो कि दो प्रकार का होता है। पहला कॉपर आईयूसीडी 380 ए का असर दस वर्षों तक रहता है। वहीं कॉपर आईयूसीडी 375 का असर पांच वर्षों तक रहता है।