औरैया। जिले में पिछले डेढ़ साल से खाली पड़े 48 पंचायत सहायकों के पदों की भर्ती इन दिनों चल रही है। इसमें तीन ग्राम पंचायतों की ओर से पंचायत सहायकों की भर्ती को लेकर प्रस्ताव ही नहीं दिए गए हैं। ऐसे में इन गांवों में युवाओं के दिलचस्पी न दिखाने की बात सामने आ रही हैं। लेकिन पंचायती राज विभाग इसे लेकर ग्राम प्रधान व सचिवों की लापरवाही के तौर पर देख रहा है। यही वजह है कि तीनों पंचायतों के सचिवों का वेतन रोका गया है। साथ ही पंचायत सचिव व ग्राम प्रधानों को नोटिस जारी किए गए हैं।
गांव में ही ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन करने की सुविधा दी गई है। इसके लिए जिले की 477 ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की तैनाती की गई थी। लेकिन, 48 पंचायतों में पंचायत सहायक किन्हीं कारणों से पद छोड़ गए थे। ऐसे में पंचायती राज विभाग ने इन रिक्त पदों को दोबारा से भरने की तैयारी की थी। ग्राम सभा की समिति से प्रस्ताव मांगे गए थे। 42 ग्राम पंचायतों में तो चयन प्रक्रिया पूर्ण हो गई, लेकिन तीन ग्राम पंचायतों में कोई आवेदन ही नहीं आया। इन पंचायतों में अजीतमल की ब्योरा नवलपुर, औरैया की गाजीपुर ईश्वरपुर व भगौतीपुर शामिल हैं। इन पंचायतों के सचिव व प्रधानों को डीपीआरओ ने नोटिस जारी किए हैं। साथ ही सचिवों पर वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है।
वहीं तीन पंचायतों बहादुरपुर, मईमानपुर व लखुनो की ओर से भेजे गए प्रस्तावों में खामियां होने पर उन्हें वापस भेजा गया है। सुधार के बाद भर्ती की प्रकि्रया आगे बढ़ाई जाएगी। डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने बताया कि तीन पंचायतों की ओर से पंचायत सहायकों के प्रस्ताव नहीं भेजे गए हैं। वहां के सचिव व प्रधान को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं सचिवों पर वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है।
ब्योरा नवलपुर में ग्राम प्रधान अवनीश कुमार व सचिव प्रफुल्ल वर्मा, गाजीपुर ईश्वरीप्रसाद में प्रधान अनुपम अवस्थी व सचिव राजीव शुक्ला, भगौतीपुर में प्रधान अरविंद कुमार व सचिव राजीव शुक्ला।