इटावा-औरैया सहित बुंदेलखंड व मध्यप्रदेश के कई जिलों को बेहतर सिंचाई संसाधन मुहैया कराने व बिजली उत्पादन को बढ़ाने के लिए ढाई दशक पहले घोषित पंचनद बांध परियोजना सिर्फ कागजों में पर दम तोड़ रही है।
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री उमा भारती का पंचनद दौरा किसी आक्सीजन से कम नहीं हैं। यदि सब कुछ ठीक रहा तो इस परियोजना को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
प्रदेश व केंद्र में सत्ता की उठापटक व राजनेताओं की उदासीनता के चलते इस योजना पर काम होना दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। जिसके चलते बीहड़ के लोगों में शासन व प्रशासन के प्रति रोष व्याप्त है। उस समय तत्कालीन विधायक व सूबे के मंत्री रहे गौरीशंकर ने बीहड़ के विकास के लिए पंचनद बांध परियोजना स्थापित कराने की पहल की थी।
सरकारों के बदले हालात व उपेक्षित रवैए के कारण किसी ने इस योजना पर दिलचस्पी नहीं ली। इसके बाद सपा के पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य ने अपने 10 वर्ष के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट का मुद्दा कई बार लोकसभा में उठाया। इसका असर हुआ और वर्ष 2006 में सपा सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर दिलचस्पी दिखाई।
सर्वे कार्य के लिए 50 लाख रुपये मंजूर कर जल निगम मऊरानीपुर डिवीजन को सौंपे। वर्ष 2007 में शासन ने यह काम सिंचाई खंड औरैया के सुपुर्द कर दिया। जिसके चलते इसकी फाइल दोनों जिलों के बीच फंसी गई। दोनों विभागों के अधिकारी एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
इस बारे में क्षेत्र के पूर्व प्रधान शिव लखन दुबे, छुन्ना दुबे, सुमित नारायण सेंगर, संतोष त्रिपाठी आदि का कहना है कि पंचनद प्रोजेक्ट पर आश्वासनों की रोटियां सेंकी गई। हकीकत में कोई आगे नहीं आया है।