सावन मास में मानसून की आस के सहारे बैठा सब्जी किसान अपनी लाचारी पर आंसू बहा रहा है। हालत यह है कि पानी के अभाव में आलू, टमाटर, पालक के बाद अब भिंडी, बैंगन और घुईया की बर्बाद फसल देखने को मजबूर है। ऐसे में वह अपनी बदहाली पर भगवान को कोस रहा है।
पतझड़ के बाद सावन ऋतु आते ही लोगों के जेहन में बरसात और हरियाली का दृश्य घूमने लगता है। किसान सावन के इंतजार में अपनी जमीन को फसल बोने के लिए तैयार करने में जुट जाता है। उम्मीद रखता है कि बरसात होगी और उसकी फसल अच्छी तरह से फले फूलेगी।
जुलाई से ही बरसात का मौसम बनने की उम्मीदें शुरू हो जाती हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ उल्टा ही दिखाई दे रहा है। अब तक आसमान में घुमड़ते बादलों की टूटती ही दिख रही है।
वहीं किसानों का भी कहना है कि उन्होंने बड़ी उम्मीद के साथ खेतों में सब्जी की फसल बोई थी, लेकिन बरसात न होने से सब कुछ तबाह हो गया।
सदर तहसील के ग्राम प्रयागपुर निवासी भूपेंद्र कुमार सेंगर अपनी बदहाली पर किस्मत को कोसते दिखे। बताया कि पहले उन्होंने आलू की फसल बोई, लेकिन पानी के अभाव में चौपट हो गई।
बाद इसके टमाटर ने भी धोखा दे दिया। बैंगन की फसल से कुछ सहारा मिलने की उम्मीद थी, वह भी तेज धूप में सूखकर खत्म हो गई। ऐसे में उन्हें नुकसान के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हुआ। गांव में सरकारी ट्यूबवेल नहीं है। प्राइवेट ट्यूबवेल हैं तो लो वोल्टेज में चल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में सिंचाई बड़ी समस्या है।
ग्राम शाबदिया निवासी गोविंद सिंह बताते हैं कि चना की फसल में नुकसान उठाने के बाद उन्होंने धान का सीजन आने तक भिंडी की बुवाई कराई। सोचा था कि इससे कुछ खर्चा ही निकल आएगा, लेकिन भीषण धूप और गर्म हवा ने पेड़ों से पानी ही सोख लिया, जिससे पेड़ों पर लगे फल सूखकर बेजान हो गए।
सब्जी किसान राहुल सिंह बताते हैं कि उनके गांव पातेपुर में सिंचाई के साधन बहुत कम है। पानी के अभाव में फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती। उन्होंने अपने खेत में घुईया की फसल बोई थी, लेकिन बरसात न होने से सूरज की तपिश में तपकर बुरी तरह से झुलस कर बर्बाद हो गई। इससे उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसदी कम क्षेत्र में बोई सब्जियां- वर्ष 2015-16 में खरीफ, रबी और जायद फसलों के लिए 21780 हेक्टेअर भूमि पर सब्जी की उपज का टारगेट निर्धारित किया गया था, जिसमें इस बार खरीफ में 10500 हेक्टेअर क्षेत्र में सब्जी की फसल उगाई गई है। इसमें लौकी, भिंडी, तोरई, कद्दू, बैंगन की फसलें शामिल हैं।
वहीं इस सत्र में निर्धारित फसलों में अलग-अलग क्षेत्रफल पर नजर डालें तो विभागीय आंकड़ों के मुताबिक खरीफ का 4356 हेक्टेअर, रबी में 10890 हेक्टेअर और जायद की फसलों के लिए 6534 हेक्टेअर का क्षेत्रफल निर्धारित किया गया है।
केवल रवी की आलू फसल में ही क्षतिपूर्ति का प्राविधान है। वह भी जब किसान केसीसी कार्ड धारक हो। अन्यथा की स्थिति में उसको नुकसान की भरपाई करने का दूसरा कोई प्राविधान नहीं है।- सुघर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी