औरैया। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना जिले में दम तोड़ रही है। सभी कागजात पूरे होने के बाद भी आवेदक बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। जिम्मेदार इसके पीछे बैंक अधिकारियों की लापरवाही को कारण बता रहे हैं।
जिले की पहचान घी को बढ़ावा देने के लिए जिला उद्योग केंद्र की ओर से योजना संचालित है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस योजना के लिए वर्ष 2020-21 में 125 आवेदन किए गए थे। जिनमें प्रशासनिक अधिकारियों की बैठकों और आवेदकों के साक्षात्कार के बाद जिला उद्योग केंद्र से 118 फाइलें संबंधित बैंकों को भेजी गईं। बैंकों ने सिर्फ 22 आवेदकों की फाइलें स्वीकृत कीं। इन 22 आवेदकों को योजना के तहत 173 लाख रुपये ऋण दिया गया। अन्य आवेदक बैंक अधिकारियों के चक्कर लगा रहे है। कभी उनसे प्रापर्टी के कागज लाने, कभी योजना की लागत कम करने की बात कहकर टरकाया जा रहा है। बैठकों में बैंक अधिकारियों को चेतावनी भी दी जा रही है।
योजना की सफलता बैंक अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही के कारण प्रभावित है। लापरवाही बरतने वाले बैंकों को डीएम लगातार बैठकों में चेतावनी दे चुके हैं। आवेदक भी कार्यालय पर बैंकों के अधिकारियों की शिकायतें कर रहे हैं। आवेदकों का कहना है कि उन्हें बैंक अधिकारी परेशान कर रहे हैं। - संध्या यादव, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र
योजना के तहत घी उद्योग लगाने के लिए छह महीने पहले फाइल विभाग से स्वीकृति के बाद बैंक पहुंची थी। बैक अधिकारी की डिमांड पर प्रापर्टी के कागज दिए, जिसे देने के बाद भी केनरा बैंक के अधिकारियों ने ऋण स्वीकृत नहीं किया। पहले फाइल इटावा जाने की बात कही थी, लेकिन अब लौटा दिया गया है। ऋण न मिलने से उद्योग नहीं लगा सके हैं। - हरी योगेश चंद्र मिश्रा, आवेदक
ओडीओपी योजना के तहत घी उद्योग स्थापना के लिए फाइल स्टेट बैंक पहुंची, लेकिन बैंक अधिकारियों ने फाइल स्वीकृत नहीं की। कई बार बैंक बुलाया, प्लाट वाले स्थान का निरीक्षण किया, अभिलेख भी मांगे। सब कुछ देने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। बैंक अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना चाहिए। - अनुराग राजावत, आवेदक