औरैया। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के लागू होने के बाद अब उपभोक्ताओं के लिए न्याय पाना न केवल सरल बल्कि बेहद किफायती भी हो गया है।
नए प्रावधानों के तहत अब पीड़ितों को लंबी कानूनी प्रक्रिया और भारी-भरकम फीस से राहत मिली है। जिला उपभोक्ता आयोग के मध्यस्थता प्रकोष्ठ के सदस्य संजीव पांडेय ने बताया कि अब पांच लाख रुपये तक के दावों पर उपभोक्ताओं को कोई न्याय शुल्क नहीं देना होगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सीधे आयोग की शरण ले सकेंगे।
अब उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ई-फाइलिंग प्रणाली शुरू की गई है, जिससे अब घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। जिला उपभोक्ता आयोग की मौद्रिक सीमा में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले की 20 लाख की सीमा को बढ़ाकर अब 50 लाख रुपये कर दिया गया है। इस बदलाव का असर स्थानीय स्तर पर दिखने लगा है।
औरैया जिले में ही हाल ही में करीब 20 ऐसे मामले दर्ज हुए हैं जिनकी दावा राशि 20 से 50 लाख के बीच है। पहले इन पीड़ितों को लखनऊ स्थित राज्य आयोग की दौड़ लगानी पड़ती थी। संजीव पांडेय ने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम महज एक दस्तावेज नहीं, बल्कि आम जनता के संघर्षों को कम करने का सशक्त जरिया है।