बिजली और डीजल से नलकूप चलाकर सिंचाई करने से फसलों की लागत बढ़ रही है।
इससे किसानों को वाजिब दाम भी नहीं मिल पाते हैं। इसलिए अब सिंचाई विभाग की
ओर से किसानों के लिए सोलर फोटोवोलटैईक इरीगेशन पंप योजना शुरू की गई है।
किसानाें की जमीनों पर सोलर पंप स्थापित करने की योजना को जमीनी धरातल पर
उतारकर राज्य व केंद्र सरकार ने अनुदान की भी व्यवस्था सुनिश्चित की है।
सिंचाई
लागत को कम करने के उद्देश्य से केंद्र व राज्य सरकार की सोलर फोटोवोलटैईक
इरीगेशन पंप स्थापना योजना के तहत 10 से 70 मीटर भू-गर्भीय जल वाले
स्थानाें का चयन किया जाएगा। शासन की ओर से इस योजना को नलकूपों के संचालन
में ऊर्जा के स्रोतों विद्युत/डीजल के विकल्प के रुप में जमीनी धरातल पर
उतारा है। लघु सीमांत एवं सामान्य किसानाें के लिए आर्थिक दृष्टि से
महत्वपूर्ण इस योजना के तहत 1800 वॉट (2 हार्स पॉवर) सरफेस पंप, 3000 वॉट
(3 हार्स पॉवर) व 4800 वॉट (5 हार्स पॉवर) समरसेविल पंप के सोलर
फोटोवोलटैईक इरीगेशन पंप जिले भर में स्थापित किए जाएंगे।
शासन से इसके लिए
लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया गया है। जिले में 1800 वॉट के पंप 75, 3000
वॉट के 100 तथा 4000 वॉट के 2 सोलर फोटोवोलटैईक इरीगेशन पंप स्थापित किए
जाएंगे। 2 हार्स पॉवर के पंप की कुल लागत 3.42 लाख रुपये अनुमानित की गई
है। इसमें 1 लाख 50 हजार 390 रुपये राज्य तथा 1 लाख 26 हजार रुपये केंद्र
खर्च के रूप में वहन करेगा। लाभार्थी किसान को 85 हजार 500 रुपये की धनराशि
अपने पास से खर्च करनी होगी। वहीं 3 हार्स पॉवर के सोलर फोटोवोलटैईक
इरीगेशन पंप स्थापित कराने में राज्य 2 लाख 56 हजार 500 रुपये व केंद्र 1
लाख 71 हजार रुपये का खर्च अनुदान के रूप में लाभार्थी किसान को देगी।
वहीं
लाभार्थी किसान 1 लाख 42 हजार 500 रुपये की धनराशि खर्च करनी होगी। इस
क्षमता के पंप की कुल लागत 5.7 लाख रुपये आंकी गई है। वहीं 5 हार्स पॉवर के
सोलर फोटोवोलटैईक इरीगेशन पंप की कुल लागत 9 लाख 12 हजार रुपये आंकी गई
है। इसमें 1 लाख 82 हजार 400 रुपये राज्य तो 2 लाख 73 हजार 600 रुपये
केंद्र सरकार अनुदान के रूप में किसान को प्रदान करेगी। वहीं लाभार्थी
किसान को 4 लाख 56 हजार रुपये कृषक अंश के रूप में खर्च करने होंगे।
पर्यावरण के साथ ही विद्युत प्रबंधन में भी होगा सहायक
शासन
की सोलर फोटोवोलटैईक इरीगेशन पंप योजना किसानाें के फसल उत्पादन खर्च को
तो कम करेगी ही वहीं प्रदूषण रहित इस पंप के प्रयोग से पर्यावरण का भी
संरक्षण होगा। साथ ही जिले में बिजली का लोड भी कम होगा।
डा. बनारसी यादव, उप कृषि निदेशक