फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

औरैयाः होटल-प्रतिष्ठानों में नहीं विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी

विज्ञापन
विज्ञापन
औरैया। लखनऊ के होटल में लगी आग की घटना ने जिले में संचालित हो रहे कई बड़े होटल व प्रतिष्ठानों में सुरक्षा की पोल खोल दी है। विनियमित क्षेत्र से कई के नक्शे स्वीकृत नहीं है। बिजली विभाग से कनेक्शन लेने से पहले विद्युत सुरक्षा विभाग से ली जाने वाले एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) भी नहीं है। इन मानकों को पूरा न करने के बाद भी जिले में बेखौफ प्रतिष्ठानों का संचालन हो रहा है। यहीं कारण है कि अक्सर शार्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं होती हैं और लोगों को जान गंवानी पड़ जाती है।
विज्ञापन

किसी भी व्यावसायिक भवन (होटल, लॉज, रेस्टोरेंट, मॉल) आदि का संचालन करने से पहले कई नियमों का पालन करना होता है। विनियमित क्षेत्र से नक्शा स्वीकृत कराने के साथ अग्निशमन, बिजली विभाग की एनओसी जरूरी होती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक विद्युत सुरक्षा विभाग की टीम यह तय करती है कि जिस भवन का संचालन कामर्शियल (व्यावसायिक) इस्तेमाल में किया जाना है उसकी वायरिंग, फिटिंग कैसी है। कितने किलो वाट के कनेक्शन की जरूरत है। इसके बाद ही लोड के हिसाब से कनेक्शन दिया जाता है। मगर जिले में इन नियमों का पालन नहीं किया गया। प्रतिष्ठानों में ओवरलोड का इस्तेमाल किया जाता है और यही सबसे बड़ा कारण है कि प्रतिष्ठानों में शार्ट सर्किट से आग लग जाती है।
विज्ञापन

इटावा/औरैया के विद्युत सुरक्षा विभाग के जेई विजय कुमार सिंह ने कहा कि औरैया में कुछ लोगों के पास ही एनओसी हैं। एनओसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। उसके बाद संबंधित आवेदक के प्रतिष्ठान का सर्वे किया जाता है। जहां किलोवॉट के अनुसार वायरिंग की फिटिंग व गुणवत्ता की जांच की जाती है, सब कुछ सही मिलने के बाद ही संबंधित को एनओसी जारी की जाती है। हालांकि, इधर काफी समय से किसी ने एनओसी के लिए ऑनलाइन कोई आवेदन नहीं किया है। इसके चलते औरैया भी लंबे समय से नहीं जा सका हूं।
कनेक्शन की स्थिति
सदर बिजली डिवीजन में कुल 88319 बिजली उपभोक्ता हैं। जिसमें कामर्शियल (व्यावसायिक) के लगभग साढ़े आठ हजार कनेक्शन हैं। इनमें से किसी ने आज तक एनओसी नहीं ली। जबकि विद्युत सुरक्षा विभाग से प्री एनओसी लेनी होती है। इसके बाद तीन वर्ष बाद ऑनलाइन आवेदन कर नवीनीकरण कराना होता है। इसके लिए विद्युत सुरक्षा टीम सर्वे कर भवन/प्रतिष्ठान का लोड, वायरिंग की गुणवत्ता व इस्तेमाल किए जा रहे इलेक्ट्रानिक उपकरणों की गुणवत्ता जांचती है, लेकिन जिले में पिछले कई वर्षों से ऐसा नहीं किया गया।
शार्ट सर्किट से शोरूम में आग लगने से हुई थी दो की मौत
जिम्मेदारों द्वारा अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन न करना लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। 23 अगस्त की रात दिबियापुर के एक कपड़ा शोरूम में शार्ट सर्किट से आग लगी। इस घटना में दुकान मालिक के भतीजे प्रणव (14) और कर्मचारी कल्लू दुबे की मौत हुई। इस भवन में भी कई मानकों की अनदेखी की गई थी। इसके बाद भी जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग, बिजली विभाग नहीं चेता।
कागजों में होता सर्वे, साठगांठ से चलते प्रतिष्ठान
बिजली सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि वह व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का समय-समय पर निरीक्षण कर बिजली संबंधित हकीकत जांचे। मगर यह कार्य दफ्तरों में बैठ कर किया जा रहा है। विभाग की निष्क्रियता और साठगांठ से प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। हादसे होने पर कुछ पर कागजी कार्रवाई कर मामला रफा दफा कर दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें