औरैया। बहुचर्चित हाइड्रा कारोबारी दिलीप की हत्या के मामले में उसकी पत्नी के प्रेमी को हाईकोर्ट से हत्या के मामले में भले राहत मिली हो लेकिन सोमवार को गैंगस्टर की जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश ने खारिज कर दी। इससे उसके जेल से बाहर आने की संभावना पर विराम लग गया। हत्याकांड में जेल भेजे गए प्रधान रामू यादव को ही जमानत मिल सकी थी, जो जमानत पर बाहर है। अन्य सभी अभी भी जेल में हैं।
मैनपुरी स्थित थाना भोगांव क्षेत्र के गांव नगला दीपा निवासी दिलीप यादव कस्बा दिबियापुर में हाइड्रा मशीन का कारोबार करते थे। उनकी शादी पांच मार्च 2025 को सियापुर गांव निवासी प्रगति से हुई थी। शादी के बाद 19 मार्च को सहार थाना क्षेत्र में पटना नहर पुल के पास उसकी हत्या कर शव फेंक दिया गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिलीप को गोली मारकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई थी। साथ ही उसके शरीर पर चोट के कई निशान मिले थे। साक्ष्य जुटाने में दिलीप की पत्नी प्रगति व उसके प्रेमी अनुराग द्वारा शूटरों के जरिये दिलीप की हत्या करवाए जाने का मामला प्रकाश में आया था। इस मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी प्रगति, प्रेमी अनुराग व हिस्ट्रीशीटर रामजी नागर को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में शूटर रामजी नागर ने घटना को अंजाम देने के लिए चमरौआ प्रधान रामू यादव का नाम सुपारी की रकम पहुंचाने के संबंध में लिया था। चमरौआ निवासी राहुल यादव का नाम भी सामने आया था। सभी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में पुलिस की ओर से सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर के तहत भी कार्रवाई की गई थी। हत्या व गैंगस्टर में प्रधान को जमानत मिल गई थी, जो फिलहाल बाहर है। अभी हाल में दिलीप की पत्नी के प्रेमी अनुराग ने हत्या के मामले में हाईकोर्ट में याचिका डाली थी, जिसकी 20 अगस्त को सुनवाई हुई और उसे जमानत मिल गई।
इसके बाद उसने विशेष न्यायाधीश कोर्ट में गैंगस्टर के मामले में जमानत याचिका डाली। सोमवार को इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विनय प्रकाश ने की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। वादी पक्ष के अधिवक्ता अंकुर अवस्थी ने बताया कि जमानत खारिज कर दी गई है। हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद उसे बाहर आने की संभावना बनी थी, जो अब खत्म हो गई है।
गैर इरादतन हत्या के दोषी दंपती व दो बेटों को सात साल की कैद
औरैया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार ने कोतवाली अजीतमल क्षेत्र के गांव सैदपुर की मडैया में पारिवारिक खेती को लेकर चल रहे विवाद में हुई हत्या में शिवकरन सिंह उनकी पत्नी मीरा देवी व उनके दो बेटों रिंकू व सीटू को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोषियों को सात-सात साल की सजा व 26-26 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
अजीतमल कोतवाली के गांव सैदपुर की मडैया निवासी वादी प्रेम नारायण ने 16 दिसंबर 2014 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वादी के अनुसार उसके चाचा शिवकरन सिंह व उनके परिवार के सदस्यों ने कुल्हाड़ी, फावड़ा हमला कर दिया था। हमले में वादी के पिता राम सिंह व मां मालती गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। घायलों को सैफई अस्पताल ले जाया गया। वहां 12 दिसंबर 2014 को वादी की मां की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। सोमवार को इस मामले की सुनवाई की गई। दोनों पक्षों दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश कैलाश कुमार ने आरोपियों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने जमा कराई गई अर्थदंड की आधी धनराशि मृतक के वारिस को देने का आदेश दिया।
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बालिका से छेड़छाड़ के दोषी को चार साल की सजा
औरैया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने दिबियापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में पांच साल पुराने छेड़छाड़ के मामले में आरोपी शिवम को दोषी करार दिया। दोषी पर कोर्ट ने 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
दिबियापुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी वादी ने मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि 15 सितंबर 2021 की दोपहर उसकी 13 वर्षीय बेटी घर पर अकेली थी। पेन मांगने के बहाने उसने बहन से छेड़खानी की थी। सोमवार को इस मामले में सुनवाई की गई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया। बाद में दोषी को इटावा जेल भेज दिया गया। (संवाद)