औरैया। नीलेश गृहिणी होने के साथ ही आशा बहू भी हैं। वह टीबी जैसी बीमारी से लोगों को मुक्ति दिलाने और जागरुकता फैलाने के लिए घर-घर घूमती हैं। वह अब तक 45 मरीजों को टीबी से मुक्ति दिला चुकी हैं।
ब्लॉक अजीतमल के गांव चिटकापुर की रहने वालीं नीलेश वर्ष 2006 से आशा के रूप में और 2012 से डॉट्स प्रोवाइडर के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके ही घर के पास दो सगे भाइयों को जब टीबी हुई तब पूरा गांव उन दोनों के साथ भेदभाव करने लगा और इस बीमारी को लाइलाज बताने लगे। एक साल के इलाज के बाद उन दोनों भाइयों ने टीबी को मात दी और पूरी तरह स्वस्थ हुए।
वह कहती हैं कि उन्होंने टीबी जैसे मर्ज को बहुत करीब से देखा है। ज्यादातर टीबी के मरीज मजदूर हैं। सुबह जल्दी काम के लिए निकल जाते हैं। वह सुबह छह बजे उठकर लोगों के पास जाकर दवाई देती हैं। एक हफ्ता पहले ही मरीजों से संपर्क कर लेती हैं और दवाई खत्म होने से पहले ही दवा उपलब्ध कराती हैं।
जिले में 957 टीबी के एक्टिव मरीज
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.एके राय ने बताया फिलहाल जनपद में 957 एक्टिव मरीज हैं, जिनमे 74 एमडीआर के हैं। उन्होंने बताया जिले में सभी डॉट्स प्रोवाइडर अच्छा कार्य कर रहे हैं, अलग-अलग श्रेणी के टीबी मरीजों को दवा खिलाने के एवज में डॉट्स प्रोवाइडर को शासन की तरफ से प्रोत्साहन राशि मिलती है। छह माह का कोर्स कराने पर एक हजार रुपये और एमडीआर टीबी के मरीजों, जिनका इलाज 24 माह चलता है, उन्हें दवा खिलाने पर डॉट्स प्रोवाइडर को पांच हजार रुपये मिलते हैं।