बाबर कालीन ऐतिहासिक मील का पत्थर
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शहर से सटे गांव पैगंबरपुर में मुगलकाल में बने ऐतिहासिक मील के पत्थर का अस्तित्व संकट में है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने करीब दो साल इसे अपने संरक्षण में लिया था। यहां नियमों व चेतावनी से संबंधित बोर्ड भी लगाया था। लेकिन विभागीय अनदेखी के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर का निचला हिस्सा टूटने लगा है। चेतावनी व निर्देशों को दर्शाने वाला बोर्ड भी अज्ञात लोगों ने उखाड़ कर फेंक दिया है। ऐसे में भारतीय धरोहर के अस्तित्व पर खतरा तो दिखाई ही दे रहा है।
बीहड़ी गांव पैगंबरपुर में मुगलकाल के दौरान दिल्ली जाते समय बाबर की फौज का जिले की सीमा से निकलना हुआ था। (इसका जिक्र बाबरनामा में भी है) उस दौरान निकलने वाले रास्ते से वापस आने के लिए एक चिंह बनाया जाता था। जिससे लौटने में रास्ते की भूल न हो। इस दौरान बाबर की फौज ने जिले में तीन स्थानों पर मील के पत्थर बनवाए थे। जिसमें से दो जरूहौलिया में बने हैं और एक पैगंबरपुर गांव में स्तूप के आकार में स्थित है। शुरूआती दौर में मील के इस पत्थर पर किसी की भी निगेहबानी न होने से धीरे-धीरे गिरने की कगार पर पहुंच गया था।
इस मामले में अमर उजाला ने कई बार खबर प्रकाशित की। तब जाकर दो साल पहले भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसको संरक्षित इमारत घोषित किया। लेकिन विभाग ने इमारत के पास निर्देशों व चेतावनी से संबंधित बोर्ड लगाकर इतिश्री कर ली। तब से आज तक इस इमारत को भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से कोई भी देखरेख नहीं की गई। परिणाम स्वरूप मील के इस ऐतिहासिक पत्थर अब स्मैक पीने वालों का अड्डा बन गया है। वहीं स्मारक के पास लगा बोर्ड भी जमीन पर उखड़ा हुआ पड़ा है। इसके कोई भी देखने वाला नहीं है।
ऐतिहासिक इमारत को नुकसान पहुंचाने वालों का पता लगाया जाएगा। इसकी जांच कराई जाएगी। भारतीय पुरातत्व विभाग को भी सूचित किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित किया है। इसकी देखभाल करने के लिए हम लोग हैं। पता लगाया जाएगा और जो भी दोषी निकलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जितेंद्र श्रीवास्तव, एसडीएम, सदर