शहर से सटे ग्राम पैगंबरपुर में बाबरकालीन मील के पत्थर को सहेजने के लिए प्रशासन के पास समय नहीं है। एक माह पहले प्रशासन ने इसे दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी किसी अफसर ने इसकी सुध नहीं ली। पुरातत्व विभाग की ओर से इसके पास बोर्ड लगाकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए थे। देखरेख के अभाव में बोर्ड भी टूटकर इधर-उधर गिरा पड़ा है। ऐतिहासिक धरोहर क्षतिग्रस्त हो रही है।
पैगंबरपुर में बाबर काल में मील का पत्थर बनाया गया था। इस तरह के पत्थर जिले में कई स्थानों पर हैं। इनमें ग्राम जरूहूलिया, कलापुर, मुरादगंज आदि शामिल हैं। पैगंबरपुर में मील के पत्थर का अस्तित्व खतरे में है। इसे भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित बताते हुए किसी भी प्रकार से हानि न पहुंचाने के निर्देश दिए गए थे। अनदेखी से अराजकतत्वों ने भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से लगाया गया बोर्ड उखाड़ कर फेंक दिया। इन्होंने पत्थर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
इसे जीर्णशीर्ण होने से बचाने के लिए अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इस पर तत्कालीन एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव ने एक-दो दिन में इस धरोहर को सुरक्षित कराने को लेकर ठोस कदम उठाए जाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी कोई नहीं आया। बाद में उनका स्थानांतरण बिधूना हो गया है । इस ऐतिहासिक पत्थर को सहेजने के प्रयास निल हैं।
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अभी चार्ज लिए ज्यादा समय नहीं हुआ है। इसकी जानकारी नहीं है। पता कराकर देखने जाएंगे। कोई टूट फूट की गई है तो मरम्मत कराई जाएगी। इसे पूरी तरह से संरक्षित किया जाएगा। यदि कोई भी ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व से छेड़छाड़ करते पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजेंद्र कुमार
एसडीएम, सदर