जिले में धान खरीद के लिए जनपद में एक अक्तूबर से 16 क्रय केंद्र संचालित हैं। साप्ताहिक और सार्वजनिक अवकाश के दिनों को छोड़कर इन क्रय केंद्रों को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक नियमित खोले जाने के निर्देश हैं। पंचायत चुनाव में अधिकारी का व्यस्त हुए मानों धान खरीद केंद्र प्रभारियों की मौज बन आई हो। एक माह से संचालित इन क्रय केंद्रों की बोहनी तो दूर की कोड़ी है, इनके नियमित खुलने पर भी संशय है। शुक्रवार को अमर उजाला ने शहर की कृषि उत्पादन मंडी समिति में संचालित धान खरीद केंद्रों की पड़ताल की तो दफ्तरी समय में भी इन खरीद केंद्रों पर सार्वजनिक अवकाश जैसे ही स्थिति नजर दिखाई दी। पड़ताल में धान खरीद केंद्रों के मिले हालातों पर अमर उजाला की खास रिपोर्ट---
समय - सुबह 11.30 बजे
शहर की कृषि मंडी समिति परिसर में खाद्य एवं रसद विभाग के संचालित क्रय केंद्र पर ताला लटकता मिला। क्रय केंद्र के आस-पास पूरी तरह सन्नाटा था। वहीं खरीद केंद्र परिसर में हाल ही में हुई बारिश से जलभराव भी दिखाई दिया। वहीं केंद्र पर पुराना सी वाल पेंटिग में बहुत ही फीके अक्षरों में लिखा खाद्य एवं रसद विभाग बड़ी मुश्किल में पढ़ने में आ रहा था। विभाग की ओर से ऐसा कुछ भी किया हुआ नजर नहीं आया कि जिससे यह जाना जा सके कि यहां कोई धान खरीद केंद्र संचालित है।
समय - सुबह 11.45 बजे
जिले में भले ही धान खरीद सत्र के तहत क्रय केंद्र संचालित कर दिए गए हों, लेकिन जिले की सरकारी धान खरीद मशीनरी को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि वह इसके लिए कतई तैयार नहीं है। मंडी समिति परिसर में ही संचालित उपभोक्ता सहकारी संघ के धान खरीद केंद्र पर भी ताला लटकता हुआ मिला। क्रय केंद्र के लगे बैनर पर क्रय प्रभारी गिरधारी लाल और उनका मोबाइल नंबर 9450077697 तो अंकित मिला। लेकिन केंद्र के बाहर धान खरीद केंद्र के संकेत तक नजर नहीं आए।
नियमित धान खरीद खोले जाने के निर्देश जारी हैं। क्रय केंद्र प्रभारियों को इस बावत कड़े निर्देश भी हैं। क्रय केंद्र बंद होने की सूचना नहीं है। जांच की जाएगी।
दिलीप कुमार, प्रभारी डिप्टी आरएमओ