औरैया। सरकारी विभागों में फाइलों की धीमी चाल और प्रशासनिक औपचारिकताओं का बहाना अब नगर पंचायत दिबियापुर पर भारी पड़ गया है।
महज 580 रुपये के जलकर विवाद से शुरू हुआ मामला अब राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सख्त टिप्पणी के साथ खत्म हुआ है। आयोग ने नगर पंचायत की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि देरी के लिए सरकारी तंत्र को कोई विशेष रियायत नहीं दी जा सकती। नगर पंचायत दिबियापुर को उपभोक्ता को हर्जाने के दो लाख रुपये अदा करने होंगे।
इस कानूनी लड़ाई की नींव साल 2018 में पड़ी थी, जब उपभोक्ता महेश चंद्र पांडेय ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग औरैया में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत थी कि जलापूर्ति न होने के बावजूद उनसे जलकर वसूला जा रहा है और दोषपूर्ण नाली निर्माण की वजह से उनकी दुकान को भी नुकसान पहुंचा है। इस मामले में तीन मार्च 2023 को जिला आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मामूली भुगतान का आदेश दिया था।
जिला आयोग के फैसले के बाद मामला राज्य उपभोक्ता आयोग लखनऊ पहुंचा। यहां नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए 29 जनवरी 2025 को आयोग ने उपभोक्ता को दो लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश सुना दिया। इस जुर्माने से बचने के लिए नगर पंचायत ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आयोग का दरवाजा खटखटाया लेकिन यहां भी उनकी सुस्ती आड़े आ गई।
नगर पंचायत ने 12 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय आयोग में रिवीजन पिटीशन दाखिल की लेकिन तब तक समय सीमा 256 दिन हो चुके थे। आयोग ने पहली ही सुनवाई में इस देरी को अक्षम्य माना और याचिका ठुकरा दी। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी संस्थाओं को भी कानून की समय सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा और प्रशासनिक फाइलों को घुमाने के नाम पर हुई देरी को माफ नहीं किया जाएगा।
जिला उपभोक्ता आयोग के मध्यस्थता प्रकोष्ठ के सदस्य संजीव पांडेय ने इस निर्णय को उपभोक्ता अधिकारों की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि 2018 से चली आ रही यह लड़ाई अब तार्किक अंजाम तक पहुंची है।