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ओडीएफ के नाम पर रेवड़ी के तरह बांटी गई धनराशि

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औरैया। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में जिले को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) करने के नाम पर शासन से मिली धनराशि का जमकर बंदरबांट का मामला प्रकाश में आया है। जिले के सात ब्लॉकों में अकेले ब्लाक भाग्यनगर की 73 ग्राम पंचायतों में बेस लाइन सर्वे के हिसाब से पांच करोड़ 82 लाख 85 हजार की अतिरिक्त धनराशि भेजी गई। स्टेट कमेटी व जिला पंचायत राज विभाग द्वारा कराए गए ऑडिट में 16 करोड़ रुपये का अंतर आया था। जिसे शासन ने वापस करने के निर्देश दिए हैं। डीपीआरओ कार्यालय पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से जांच में जुटा है, लेकिन फिलहाल सक्षम अधिकारी इस मामले में खुलकर बोलने में परहेज कर रहे हैं।
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जिले को ओडीएफ के नाम पर ब्लॉक भाग्यनगर, सहार व ऐरवाकटरा में शौचालयों के नाम पर जमकर धनराशि का बंदरबांट किए जाने का खुलासा हुआ। ब्लॉक भाग्यनगर की ग्राम पंचायतों में बेस लाइन सर्वे के हिसाब से निर्धारित शौचालयों से कई गुना अधिक शौचालयों की धनराशि डीपीआरओ कार्यालय से भेजी गई। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत वर्ष 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौचमुक्त अभियान की शुरुआत की थी। जिले में बेस लाइन सर्वे के हिसाब से एक अरब 67 करोड़ 54 लाख 52 हजार रुपये से एक लाख 39 हजार 621 शौचालय का निर्माण पूरा कर जून 2018 में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया था। ओडीएफ होने के बाद स्टेट द्वारा कराए गए ऑडिट व जिले के ऑडिट में भेजी गई धनराशि में 16 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया था।
जिसे शासन ने वापस करने के निर्देश दिए थे। जबकि डीपीआरओ कार्यालय में शौचालय मद में साढ़े सात करोड़ रुपये की धनराशि ही शेष मिली थी। पिछले दिनों वीडियो कांफ्रेसिंग में डायरेक्टर पंचायती राज ने अतिरिक्त भेजी गई धनराशि शासन वापस भेजने के निर्देश दिए थे। इस प्रकरण को डीएम अभिषेक सिंह व सीडीओ बृज किशोर पाठक ने डीपीआरओ राजेश चौरसिया को प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
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ग्रामीण स्वच्छता मिशन कार्यक्रम के तहत ब्लॉक भाग्यनगर की 73 ग्राम पंचायतों में 19 पंचायतों में स्वच्छता मिशन के पुराने खाते के साथ-साथ दूसरा नया खाता दूसरी बैंक में खुलवाया गया। जिनमें ऐसी 19 ग्राम पंचायतों के एक खाते में ही शौचालय निर्माण के लिए एक करोड़ 82 लाख 85 हजार रुपये की धनराशि अतिरिक्त भेजी गई। गौरतलब बात यह है कि जब पहले खाते में इतनी अतिरिक्त धनराशि भेजी गई, तो दूसरे खाते में कितनी धनराशि भेजी गई है। यह बताने में जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल जांच होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। किसी निधि का खाता बंद होने अथवा संचालन में दिक्कतें आने की स्थिति में ही नया खाता खोलने का प्रावधान है। जबकि पुराने खाते के संचालन के साथ-साथ नया खाता खुलवाना वित्तीय अनियमितता की परिधि में आता है।
ग्रामीण स्वच्छता मिशन कार्यक्रम में जिले को ओडीएफ करने के शासन से भेजी गई धनराशि को अनियमित तरीके से ग्राम पंचायतों में बेस लाइन सर्वे के हिसाब से अधिक धनराशि भेजी गई थी। शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीपीआरओ कमल किशोर ने जिले के सात ब्लाकों की ग्राम पंचायतों में भेजी गई धनराशि की जांच में बड़े पैमाने में अनियमितता का मामला प्रकाश में आया था। जिसमें जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतें ऐसी थी, जिसमें बेस लाइन सूची से कई गुना अधिक धनराशि अनियमित तरीके से भेज दी गई थी। जिसका समायोजन उनके द्वारा ऐसी पंचायतों में कराया गया था, जिनमें कम धनराशि पहुंची थी। इसके बाद भी शासन और जिले के ऑडिट में 16 करोड़ अतिरिक्त मिला। जिसमें साढ़े सात करोड़ रुपये की धनराशि डीपीआरओ कार्यालय के खातों में शेष बची है। बाकी के लगभग साढ़े आठ करोड़ रुपये की धनराशि की जांच की जा रही है।
ब्लॉक भाग्यनगर की ग्राम पंचायतों में एक खाता बंद करने के बाद ही दूसरा खाता खुलवाया गया है। दोनों खातों का संचालन नहीं किया गया है।
-सुरेश बाबू, एडीओ पंचायत
ब्लॉक भाग्यनगर में ग्रामीण स्वच्छता मिशन कार्यक्रम के तहत 19 ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत निधि छह के दो खातों का संचालन का मामला प्रकाश में आया है। भाग्यनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायतों के स्टेटमेंट मंगवाए गए हैं। डीपीआरओ कार्यालय से भी बैंक शाखाओं के प्रबंधकों को ग्राम पंचायतों के खातों के स्टेटमेंट मंगवाए गए हैं। 477 ग्राम पंचायत हैं। जांच चल रही है। जल्द मामला प्रकाश में आएगा।
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-राजेश चौरसिया, डीपीआरओ
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