औरैया। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत चौंकाने वाली है। एक तरफ मेडिकल कॉलेज से लेकर अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की दवा लिखी जा रही है। वहीं दूसरी तरफ ड्रग वेयर हाउस में लाखों की दवा एक्सपायर हो गई। बीते दो सालों में एक्सपायर दवा से एक बड़ा कमरा भर चुका है। समय रहते ये दवाएं मरीजों को बांटने के बजाय कमरे में ही कैद कर बेकार कर दी गईं।
शासन की ओर से सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को सभी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए 300 दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनका भरपूर स्टॉक जिले को भेजा जा रहा है। ड्रग वेयर हाउस से डिमांड के अनुसार ये दवाएं मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भेजी जाती हैं। हाल ही में अमर उजाला की पड़ताल में चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज में सरकारी पर्चे पर बाहर की दवा लिखने का मामला उजागर हुआ था। इसके बाद से ही जिम्मेदारों में खलबली मची हुई है।
लेकिन, जिम्मेदारों पर संवदेनहीनता इस कदर हावी है कि वह दवाओं का स्टॉक होने पर भी मरीजों को निशुल्क दवाएं नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। भले ही ड्रग वेयर हाउस में दवाएं एक्सपायर हो जाएं। बृहस्पतिवार को समाधान पुर्वा स्थित ड्रग वेयर हाउस की पड़ताल में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। यहां बीते दो सालों में करीब एक ट्रक दवा एक्सपायर हो चुकी है। वितरण न होने के चलते यह दवा एक्सपायर हो गई, जिसे हॉल में भर दिया गया। जिम्मेदार इसकी कीमत तो नहीं बता रहे हैं, लेकिन दवाओं की इतनी बड़ी मात्रा से यह साफ है कि इसकी कीमत लाखों में है। ये दवा मरीजों को अगर मिल जाती तो शायद किसी की जान बच जाती, पर जिम्मेदारों ने इसकी जहमत नहीं उठाई। अब मामले में अधिकारी चुप्पी साधे हैं। ड्रग वेयर हाउस प्रभारी राजकुमार गुप्ता हों या फिर स्टाफ कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में एक साल पहले तत्कालीन प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने सरकारी आपूर्ति के अलावा तीन करोड़ से अधिक की दवाएं मरीजों को राहत देने के लिए अलग से मंगवाईं थीं। सूत्रों के अनुसार इन दवाओं में से भी बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायर हो गईं। इन दवाओं को धीरे-धीरे स्टाफ ने ठिकाने लगा दिया। अब यहां डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवा लिखने के मामले सामने आ रहे हैं। इसके अलावा उस समय के स्टोर प्रभारी समेत अन्य स्टाफ भी बदल दिए गए हैं।
ड्रग वेयर हाउस प्रभारी राजकुमार गुप्ता का कहना है कि उनके पास अस्पतालों से जो डिमांड आती है, उतनी दवा वह भेज देते हैं। बाकी जो दवा बचती है वह एक्सपायर हो जाती है। ऐसे में सवाल यह है कि अगर जिले के अस्पतालों से दवाओं की डिमांड कम है तो ड्रग वेयर हाउस इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं शासन से क्यों मंगा रहा है। लेकिन इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
सरकारी अस्पतालों से डिमांड के अनुसार दवा की आपूर्ति कराई जाती है। शासन की ओर से बड़ी मात्रा में दवाएं भेजी जाती हैं। जो दवाएं एक्सपायर हुईं हैं उन्हें वापस भेजा जाएगा। इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायर होने की जानकारी भी की जाएगी।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी