औरैया। मेडिकल कॉलेज में नर्स, टेक्नीशियन, वार्ड बॉय समेत स्वास्थ्यकर्मियों में 380 पद स्वीकृत हैं। इसमें से महज 49 की तैनाती है जबकि यहां पर 600 से 2000 के पार ओपीडी पहुंच गई है। हर रोज 500 पुराने मरीज भी आ रहे हैं, जिन्हें स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही है। इसकी वजह से वहां तैनात चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ पर बोझ बढ़ा है। हालांकि मेडिकल कॉलेज में जुगाड़ से स्वास्थ्य सेवाएं दौड़ाई जा रही हैं। ऐसे में सेवाओं में लेटलतीफी से मरीज तमाम तरह की दुश्वारियां झेलने को मजबूर हैं। उधर, स्टाफ की कमी को मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी स्वीकार कर रहा है लेकिन इस समस्या को दूर करने को लेकर कोई ठोस कदम फिलहाल एक साल से देखने को नहीं मिल रहा है।
एक साल पहले मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत टेंडर प्रक्रिया अपनाई थी जिसे खामियों के चलते शासन स्तर से रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके बाद दोबारा से स्टाफ जुटाने को लेकर टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी लेकिन यह क्रम पिछले एक साल से जारी है। इसके बाद भी जरूरी स्टाफ की तैनाती मेडिकल कॉलेज में सुनिश्चित नहीं हो सकी है। खास बात तो यह है कि मेडिकल कॉलेज में 250 नर्सों की जरूरत है। इसके मुकाबले महज 29 नर्स से काम चलाया जा रहा है।
टेक्नीशियन, वार्ड बॉय व क्लर्क तो दूर की बात है। स्टाफ की कमी के बीच शासन स्तर से कर्मियों की तैनाती को लेकर निगम का पेच भी फंस गया है। एक तरफ आउटसोर्सिंग में भर्ती की कागजी दौड़ चल रही है। दूसरी ओर निगम से भर्ती का खाका शासन स्तर से खींचा जा रहा है। जानकार बताते हैं कि निगम से भर्ती की राह लंबी होगी। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की सेवाएं बेहतर होने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना होगा। इस सब के बीच मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से शासन की पैरवी का इंतजार किया जा रहा है।
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इन स्वास्थ्यकर्मियों की है जरूरत
नर्स- 250
टेक्नीशियन- 90
वार्ड ब्वाय- 40
क्लर्क- 40
मेडिकल कॉलेज में 23 अलग-अलग विभाग बन गए हैं लेकिन यहां की कागजी कवायद के लिए क्लर्क की तैनाती नहीं हो सकी है। 40 क्लर्क होने चाहिए। लेकिन मौजूदा समय में महज दो क्लर्क ही हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के अलग-अलग विभागों का क्रियान्वयन काफी हद तक मजबूत नहीं हो पा रहा है।
इमरजेंसी के लिए पिछले दिनों रखी थी स्टाफ नर्स की मांग
मेडिकल कॉलेज में 20 बैड की इमरजेंसी है। जिले के ज्यादातर गंभीर मरीज यहां पर आते हैं लेकिन स्टाफ नर्स का अभाव यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं को बेपटरी कर रहा था। ऐसे में पिछले स्वास्थ्य समिति की बैठक में मेडिकल कॉलेज की ओर से सात स्टाफ नर्स की मांग रखी गई थी। सीएमओ की ओर से सात नर्स की तैनाती सुनिश्चित की गई। लेकिन यहां पर अभी तक सातों ने तैनाती नहीं ली है। महज तीन लोगों ने ही पदभार ग्रहण किया है।
जल्द होगा निर्णय
मेडिकल कॉलेज में मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले स्टाफ की कमी है। इसे लेकर आउटसोर्सिंग के तहत कर्मियों की तैनाती की बिड भी डाली जा चुकी है। उधर, शासन स्तर से निगम से भर्ती का खाका बना है। जल्द ही इस मामले कुछ निर्णय शासन स्तर से तय होने का इंतजार है।
- डॉ. मुकेश वीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
फोटो-10एयूआरपी 10- मेडिकल कॉलेज की ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद