नगर पालिका परिषद् द्वारा शरदोत्सव प्रदर्शनी में शनिवार को कुल हिंद मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने अपने कलाम से श्रोताओं को बांधे रखा। मुशायरे का आगाज प्रो. हशमत उल्ला खां व अध्यक्ष प्रतिनिधि लालजी शुक्ला ने संयुक्त रुप सेे शमं रोशन कर किया। आयोजकों ने शायरों इस्तकबाल किया। संचालक युवा कवि अजय शुक्ला ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मीसंम गोपालपुरी ने नाते पाक से की। उनका शेर इतना बेजान हूं अहसास के मारों की तरह, फूल चुभते जिस्म में छालों की तरह काफी पसंद किया गया। अयाज अहमद की गजल अपने अमल से अपनी सदाकत चली गई, मगरूर हो गए तो हुकूमत चली गई, जिन लोगों ने मां-बाप की इज्जत को न समझा, हाथाें से उनके दोस्ताें जन्नत चली गई, सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। मशहूर शायर मुनव्वर राना ने सियासत नफरतों का जख्म भरने नहीं देती गजल सुनाई।
उनकी गजल मोहब्बत करने वालों में यह झगड़ा डाल देती है, सियासत दोस्ती की जड़ों में मट्ठा डाल देती है सुनाई। इलियास जलालाबादी ने मुझे प्यार जब से तुम्हारा मिला, मेरी जिंदगी को सहारा मिला। माजिद देवबंदी ने यह शेर पढ़ा, जरा सी बात क्या कह दी खफा से होकर रह गए, खुदा ने नूर क्या दिया खुदा हो गए। वहीं कानपुर से आई तरन्नुम कानपुरी ने बुझाने वाले चिरागे वफा बुझाते हैं, रस्ते मैं जानती हूं खतरा जरूर है, मंजिल पर फिर भी मुझे जाना जरूर है, अब रास्तों में कोई जलाता नहीं चिराग, तस्लीम सबको है कि अंधेरा जरूर है गजल सुनाई। मुशायरे में अरशद जिया मुजफ्फराबादी ने अपना कलाम गरज वाले मुसीबत वाले सिसकता छोड़ देते हैं, परिंदे सूखती झीलों को तन्हा छोड़ देते हैं।
लखनऊ से आई नूरी परवीन ने प्यार का तकाजा है, मैं न वापस आऊंगी, उम्र भर तू रूठेगा, उम्र भर मनाऊंगी शायरी सुनाई। वहीं कुलहिंद मुशायरा में मजाहिया शायर पपलू लखनवी, जियो बांदवी, उत्तराखंड के सज्जाद झंझट ने अपनी शायरी के माध्यम से लोगों को खूद गुदगुदाया। दूर दूर से शरदोत्सव प्रदर्शनी में शिरकत करने आए शायरों एवं गजलकारों ने औरैया शहर की जनता से खूब वाह वाही लूटने का काम किया। इससे पहले कार्यक्रम संयोजक जैनुल आबदीन, मोहम्मद इदरीश, हरीओम शर्मा, राजवीर पाल, नरेंद्र तोमर, राजेश बाजपेई, कमरुल निशा, ओमकार अग्निहोत्री, रहीस खां, अयाज अहमद अयाज ने कार्यक्रम में आए शायरों को माल्यार्पण व शाल पहनाकर सम्मानित किया।