औरैया। माता-पिता की सेवा करने से ही सुख की प्राप्ति होती है। उनकी दुआएं ही मंजिल में आने वालीं कठिनाइयों को दूर करतीं हैं। यह बात आवास विकास स्थित काली माता मंदिर पर हो रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को प्रवचन के दौरान आचार्य सत्यदेव द्विवेदी ने कही। उन्होंने भक्त और भगवान के बीच संबंध के बाबत से विस्तार से वर्णन किया।
प्रवचन के दौरान आचार्य सत्यदेव द्विवेदी ने कंस वध की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान कभी किसी को नहीं मारते, व्यक्ति अपने नीच कर्मों से स्वयं मर जाता है। भगवान ने अपने माता देवकी और पिता वासुदेव को जेल से निकला और समाज को संदेश दिया जो पुत्र सर्व समर्थ होकर अपने माता-पिता की सेवा नहीं करता, उसे नरक में जाना पड़ता है।
भगवान कंस का उद्धार करने के बाद श्रीकृष्ण चाहते तो मथुरा पर स्वयं राज्य कर सकते थे, लेकिन मथुरा का राज्य अपने नाना उग्रसेन को सौंप दिया। भगवान कृष्ण का सिद्धांत है कि जो जिसका अधिकारी होता है, उसको उसका अधिकार मिलना चाहिए। भगवान कृष्ण और बलराम के विवाह के साथ ही बाणासुर की कथा सुनाई। बताया बाणासुर की हजार भुजाएं थीं, लेकिन बाणासुर की बिटिया उषा ने बाणासुर की हजारों भुजाएं कटवा दी। इस प्रसंग में कथा वाचक ने कहा कि कितना कुछ भी धन वैभव हो लेकिन अभिमान नहीं करना चाहिए, ज्यादा अभिमानी व्यक्ति अपनी संतान से नीचा देखते हैं।