मोहल्ला सूरजपुर में श्रीमद भागवत कथा में आचार्य पं. महेशचंद्र पांडेय ने कहा कि भक्त और भगवान का अटूट रिश्ता होता ह,ै लेकिन जब उसके अंदर लोभ और मोह उत्पन्न हो जाता है तो भगवान उससे नाराज हो जाते हैं।
कहा कि भगवान कभी अंहकारी को क्षमा नहीं करते। मनुष्य को अहंकार से परे भगवान की उपासना सच्चे मन से करनी चाहिए।
भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य पं. महेशचंद्र पांडेय ने कहा कि भगवान का अटूट रिश्ता उनकी कृपा से बनता है। भगवान की भक्त पर कृपा से ज्ञान, विश्वास, प्रेम और भक्ति का प्रवेश होता है।
कहा कि प्रेम के बगैर भक्ति नहीं होती। भगवान से प्रेम के कारण ही भक्त का समाज में अस्तित्व है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति में यदि अंहकार आ जाए तो भगवान क्षमा नहीं करते।
कहा कि व्यक्ति यदि भगवान को बुलाता है, वह जरूर आते हैं, लेकिन उसके लिए मन की शुद्धता जरूरी है। कहा- निर्मल मन सोहि माय भावा, मोरा क्षण प्रवचन भावा।
उन्होंने कहा कि तन को धोने से कुछ नहीं होगा। जब मन को धोगे, तब भगवान दिखने लगेंगे। इस मौके पर पं. सुशील कुमार वाजपेयी, परीक्षित ब्रजेंद्र प्रताप सेंगर, मनिया सिंह सेंगर, बाबूराम बाथम, कोमल सिंह भदौरिया आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।