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Auraiya News: औरैयाः 25 करोड़ से बने समेकित विशेष विद्यालय में ताला

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फोटो27एयूआरपी-05- कंचौसी के हीरानगर में बना विशेष समेकित विद्यालय। संवाद - फोटो : AURAIYA
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औरैया। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सब पढ़ें, सब बढ़ें का सपना जिले में दिव्यांगों के लिए साकार होता नजर नहीं आ रहा है। दिव्यांगों को शिक्षित करने के लिए कंचौसी के हीरानगर में 25 करोड़ से बने समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय में ताला लटक रहा है। चार साल बीतने के बाद भी आज तक स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी। इससे यहां दिव्यांग बच्चों का प्रवेश नहीं हो पा रहा है।
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दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा दिव्यांगों को शिक्षित करने के लिए वर्ष 2012 में हीरानगर में विद्यालय बनाने की मंजूरी दी थी। करीब 25 करोड़ की लागत से सात एकड़ में स्कूल का निर्माण कराया गया। स्कूल के अंदर कक्षाओं के साथ ही खेल मैदान, बालक बालिकाओं के लिए अलग अलग छात्रावास समेत अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखा गया।
करीब चार साल से विद्यालय का भवन बन कर तैयार है। स्कूल में स्टाफ की तैनाती न किए जाने से यहां मूकबधिर, दिव्यांग बच्चों का प्रवेश नहीं हो पा रहा है। जबकि इसके संचालन से जिले के दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा की उम्मीद जगी थी। इस भवन की देखरेख की जिम्मेदारी फिलहाल दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की है।
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दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि स्कूल में स्टाफ की तैनाती शासन से की जानी है। इसके लिए पत्राचार भी किया गया है। शासन से जो निर्देश मिल रहे हैं, उसी के तहत कार्रवाई की जा रही है। स्टाफ की तैनाती होने पर ही संचालन होगा।
स्कूल में 500 दिव्यांग सीटें
समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक से 12 तक के 500 बच्चों के प्रवेश के लिए सीटें निर्धारित की गई है। बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया हो इसके लिए विशेष तकनीकी के स्मार्ट क्लास बनाए गए हैं। पिछले काफी समय से जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए स्कूल का संचालन और स्टाफ की कवायद बेमकसद साबित हो रही है।
आवास के लिए फिर जारी हुए एक करोड़
स्टाफ की तैनाती न करने के बजाय सरकार निर्माण पर ध्यान दे रही है। 24 नवंबर को ही सरकार ने हीरानगर स्कूल में शिक्षकों के आवास व अन्य संसाधनों को पूरा करने के लिए भेजे गए पांच करोड़ के प्रस्ताव में एक करोड़ की मंजूरी दी है। इसके लिए विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन अजीत कुमार ने निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को पत्र भेजा है।
शहर में संचालित हो रहा आवासीय स्कूल भी बंद
दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने के लिए कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए शहर के एक किराये के भवन में आवासीय स्कूल संचालित होता था। कोरोना काल के बाद से बजट के अभाव में यह भी बंद हो गया। बीएसए विपिन कुमार तिवारी का कहना है कि जो दिव्यांग बच्चे स्कूल आते हैं, उन्हें विशेष शिक्षकों द्वारा शिक्षित किया जा रहा है।

फोटो-27एयूआरपी-06 देखरेख के अभाव में स्कूल के अंदर उगी घास। संवाद- फोटो : AURAIYA

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