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जनपद पहुंचे 79 मजदूरों को किया गया क्वारंटीन

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औरैया/बिधूना/अजीतमल। लॉकडाउन के चलते हरियाणा, पंजाब, हिमाचल आदि राज्यों में फंसे जिले के 79 मजदूर रविवार की रात औरैया पहुंचे। इसमें कुछ काम की तलाश में गए थे, कुछ इधर-उधर मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजर बसर करते थे। लॉकडाउन के बाद कामकाज ठप होने से फंस गए थे। जिले की सीमा अनंतराम टोल प्लाजा पर पहुंचे मजदूरों का स्वास्थ्य विभाग की टीम ने थर्मल स्क्रीनिंग की। इसके बाद तहसीलवार शेल्टर होम में 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया गया। 14 दिन की अवधि बीतने के बाद ही सभी को घर भेजा जाएगा।
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रविवार की रात विभिन्न राज्यों से पहुंचे 79 मजदूरों को उनके घरों के पास तीनों तहसीलों में बने शेल्टर होम में क्वारंटीन किया गया है। औरैया शहर में जालौन चौराहा के पास ईशा वाटिका में 12, बिधूना तहसील में 45 और अजीतमल तहसील क्षेत्र में बने शेल्टर होम में 22 लोगों को क्वारंटीन किया गया है। एसडीएम सदर विजेता ने बताया कि सभी को 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया गया है। 14 दिन बाद उनकी दोबारा थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद ही घर भेजा जाएगा।
ईशा वाटिका में क्वारंटीन किए गए आदेश कुमार माल्हेपुर गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि काम की तलाश में कालका (हिमाचल) गए थे। वहां पहुंचने पर लॉकडाउन होने से वह वहीं फंस गए। उनके पास पैसा भी खत्म हो गया था। प्रदेश सरकार ने उनकी सुनी, पर घर की ड्योढ़ी पर आकर घर के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। 14 दिन के लिए क्वारंटीन किए गए हैं।
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बिधूना तहसील के गांव मानी कोठी कुदरकोट निवासी रामकुमार हरियाणा में काम की तलाश में गए थे। वहां लॉकडाउन के चलते फंस गए थे। इस दौरान उसके चाचा का निधन हो गया है, वह अंतिम संस्कार में भी नहीं शामिल हो सके। शेल्टर होम में क्वारंटीन हैं। घर जाने की इजाजत अधिकारियों ने नहीं दी है। घर पहुंचने के बाद ही पूरी तरह आराम मिलेगा।
बिधूना में क्वारंटीन किए गए अखिलेश ने बताया कि वह अमृतसर में रेहड़ी चलाकर परिवार चलाता है। परिवार में उसकी पत्नी प्रीती और पुत्र अंश है। अमृतसर में उसे शेल्टर होम में क्वारंटीन किया गया था। वहां से उसे यहां भेजा गया। यहां भी क्वारंटीन किया गया है। अब तो 14 दिन बाद दोबारा जांच के बाद ही घर जाने को मिलेगा। तब तक घर परिवार से दूर रहना है।
बिधूना के कुदरकोट निवासी रमेश पुत्र मातादीन की पत्नी ऊषा ने बताया कि उसके पति गुरग्राम में कपड़ा फैक्ट्री में काम करते हैं। लॉकडाउन के चलते वह वहां घर में कैद थे। हालात खराब होने पर वह वहां से पति, दो पुत्री ज्योति, पूजा और पुत्र राहुल को लेकर चली थे। कोशीकला में बस मिली, जिससे वह यहां पहुंची। घर न पहुंचने का मलाल है।
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