आलू की फसल खोद रहे किसानों के चेहरों पर मायूसी है। खेतों में आलू की फसल में मकवा और गुल्ली देख किसान की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। एक बीघे में 200 पैकेट आलू की आस लगाए किसानों के हाथ 120-140 पैकेट ही लग रहे है। गुल्ली को खेतों में जलाने के अलावा किसानों को कुछ सूझ नहीं रहा है।
औरैया-दिबियापुर रोड स्थित कठवतू गांव में आलू की खुदाई में मिंटू चौहान का पूरा परिवार लगा था। घर की महिलाएं आलू की खुदाई करती दिखी। तो दूसरी ओर पुरुष आलू की छटनी में लगे थे। आलू के ढेर की ओर इशारा करते हुए मिंटू ने बताया कि एक चौथाई फसल गुल्ली निकल रही है। तो आठ पैकेट पर मकवा के ग्रसित आलू को फेंक चुके है।
उन्होंने आलू की बुवाई तो सही समय पर की थी लेकिन अक्तूबर-नवंबर में सर्दी न पड़ने से फसल में गुल्ली रह गई। प्रति बीघा उन्हें 80 पैकेट तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं जरुलिया के किसान मानिक सिंह बताते हैं कि खराब मौसम के चलते मकवा की मार ने फसल को बर्बाद किया है।