औरैया। फतेहगढ़ जेल में बंद आजीवन कारावास के दोषी रामजीवन की रिहाई राज्यपाल ने नामंजूर कर दी। वह बालक का अपहरण कर हत्या करने में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है।
उसने वर्ष 2004 में सात साथियों के साथ मिलकर घटना अंजाम दी थी। बीस वर्ष की सजा पूरी होने के बाद कारागार प्रशासन ने उसकी रिहाई की अनुमति के लिए राज्यपाल को उसका प्रार्थना पत्र भेजा था।
दिबियापुर कस्बे के मोहल्ला दुर्गा नगर निवासी रामजीवन (59) ने पांच जुलाई 2004 को क्षेत्र के 12 वर्षीय एक बालक का अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण कर लिया था। बाद में उसकी हत्या कर दी। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
मामले में करीब 11 साल बाद रामजीवन को दोषी करार दिया था। तब से वह जेल में निरुद्ध है। दोषी अब तक 18 साल छह माह 28 दिन व सपरिहार 20 साल तीन माह 19 दिन की सजा काट चुका है। जेल प्रशासन ने शासन को रिहाई का प्रार्थना भेजा था। जिसे राज्यपाल ने चार सितंबर को अस्वीकार कर दिया। मामला फिरौती का था।