भीषण गर्मी और उसम से जूझ रहे जिले के पांच सैकड़ा से अधिक तालाब अभी भी बूंद-बूंद के लिए प्यासे हैं। ऐसे सूखे तालाब प्रशासन की मंशा साफ जाहिर कर रहे हैं।
अप्रैल में शासन से मिले निर्देशों के बाद भी सूखे पड़े तालाबों को भराया नहीं गया। आज भी पशु-पक्षियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। इधर परियोजना निदेशक जीपी गौतम सभी खाली पड़े तालाबों को शीघ्र भरवाए जाने की बात कह रहे हैं।
जिले में सूखे पड़े तालाबों की पड़ताल करने निकली अमर उजाला की टीम जब सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम चिचौली पहुंची तो वहां सड़क किनारे का ही तालाब सूखा मिला। इसके अलावा सड़क किनारे बसे ग्राम तुर्कीपुर चित्तर सिंह में बने पांच तालाबों में सभी सूखे दिखाई दिए।
वहीं विभागीय आंकड़ों में जिले के ब्लाकों में स्थित 1971 कुल कब्जा मुक्त तालाबों में पहले से 1091 तालाब भरे दर्ज हैं।
आंकड़ों में खाली पड़े 880 तालाबों में 10 जून से शुरू हुए तालाब भरो अभियान में अब तक 376 तालाबों को भरा दिखाया गया है, जबकि 504 तालाब अभी तक भरने शेष हैं। ऐसे में समय से तालाबों के न भरे पाने का खामियाजा पशु व पक्षियों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
खास बात यह है कि खानपुर चौराहे के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पशु- पक्षियों के लिए पेयजल की कोई सुविधा न होने के चलते कई पक्षी मृत पाए गए।
इस संबंध में बाबा रुप नारायन बताते हैं कि वह प्रतिदिन पक्षियों को दाना चुगाते हैं, लेकिन मई से शुरू हुई भीषण तपिश के चलते पक्षियों का झुंड पानी की तलाश में इधर-उधर चला गया है। वहीं मौके पर कुछ पक्षी भी मृत पड़े दिखे।
जिले के सभी तालाबों व पोखरों को भरने के लिए अप्रैल में ही आदेश जारी कर दिए गए थे। आदेश के बाद तालाबों को भरवाने का अभियान चल रहा है, फिर भी यदि कोई तालाब कहीं खाली पड़े हैं। इस पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारी को उन्हें भरवाने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जीपी गौतम, परियोजना निदेशक