फोटो 12एयूआरपी 25- भवतोष पांडेय
- फोटो : AURAIYA
दिबियापुर (औरैया)। इंजीनियरिंग करने के बाद हिंदी के प्रति समर्पण और रुचि ने गेल में सीनियर मैनेजर भवतोष पांडेय को हिंदी का लेखक बना दिया। अब तक उनके कई कथाओं के संग्रह पुस्तक एवं कई अखबारों एवं मासिक पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित हो चुकीं हैं। वह कहते हैं कि हिंदी के पाठकों की संख्या बढ़ाने के लिए लेखक काल्पनिक के बजाय आसपास घटित होने वाली सच्ची कहानियों को लिखें। ऐसी कहानियों में लगे कि चरित्र हम आपके बीच में से ही निकले हैं।
मूल रूप से वाराणसी निवासी गेल पाता संयंत्र के जीपीयू में सीनियर मैनेजर भवतोष पांडेय के अनुसार उन्होंने बीएचयू आईआईटी से बीटेक करने के बाद गेल में वर्ष 2009 में अपनी सेवाएं शुरू कीं थीं। इससे पहले सिविल सेवा में जाने के लिए तैयारी की तो मुख्य विषय के रूप में अभिरुचि के तौर पर हिंदी साहित्य एवं लोक प्रशासन रखे। गेल में आने के बाद उनकी हिंदी के प्रति उनकी रुचि लगातार बढ़ती रही। वह समय निकालकर हिंदी में लेखन करते रहे। वर्ष 2018 में आनलाइन प्रकाशित होने वाले पोर्टल ‘हिंदी प्रतिलिपि’ में उनकी पहली कहानी सारांश प्रकाशित हुई थी। वर्ष 2019 में कथा संग्रह ‘जुलूस की भीड़’ प्रकाशित हुई। अमेजन पोर्टल पर इस कथा संग्रह ने टॉप 100 में जगह बनाई। सितंबर माह के हंस पत्रिका में ‘भूख और भय’ कहानी प्रकाशित हुई है। उनकी रचनाओं को पत्रिका हंस, अमर उजाला काव्य, हिंदी प्रतिलिपि, राजभाषा सहयोग आदि में स्थान मिल चुका है। उनका कहना है कि हिंदी लेखकों को काल्पनिक की बजाय आसपास घटित होने वाली सच्ची कहानियां लिखनी चाहिए। बताया कि वह हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अंग्रेजी अखबारों, साहित्यों में समसामयिक मुद्दों को पढ़कर हिंदी में लिखते हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते रहते हैं।