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नम आंखों से दी जवान को अंतिम विदाई

Fri, 13 Nov 2015 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
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लेह में सर्च आपरेशन के दौरान दम तोड़ने वाले बीएसएफ जवान को गुरुवार दोपहर बाद नम आंखों से उसके पैतृक गांव जैती राम नगला में अंतिम विदाई दी गई। गार्ड आफ आनर के दौरान वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें छलक पड़ी। शुक्रवार को भी शहीद होने वाले जवान के घर पर ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा रहा।
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जैती राम नगला निवासी सुसासन्न के बेटे बीएसएफ जवान रामवीर (47) की तैनाती लेह इलाके में थी। जहां सर्च आपरेशन के दौरान उनकी मौत हो गई। बीएसएफ के अन्य जवान गुरुवार को उनका शव लेकर जैती राम नगला पहुंचे। सूचना पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। धीरे-धीरे वहां कई गांवों के लोगों की भीड़ जमा हो गई।

रामवीर को पूरे सम्मान एवं गार्ड आफ आनर के साथ अंतिम विदाई दी गई। एसडीएम बिधूना मदन चंद्र दुबे ने बताया कि लेह से आए सैनिकों ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी नहीं आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही फौजी की मौत के कारणों का खुलासा हो पाएगा। इस मौके पर एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव, दिबियापुर विधायक प्रदीप यादव, अछल्दा थानाध्यक्ष शिव कुमार मौजूद रहे।
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अधूरा रह गया बहनों का सपना
भैयादूज पर भाई को टीका करने की उम्मीद लगाए बहनों का सपना अब जीवन भर अधूरा रहेगा। फौजी रामवीर ने फोन पर पहले ही घर न आने की बात कही थी। इसके चलते बहन बिट्टन और ऊषा देवी ने सरहद पर ही भाई को रोचना भेजने का निश्चय किया था। लेकिन भैया दूज से दो दिन पूर्व भाई के मरने की खबर सुन बहनों के आंसू बह चले।

देश के लिए कुर्बान हो चुके बड़े भाई
दुसासन्न के घर में यह दूसरी बार है जब कोई देश के लिए शहीद हुआ है। इसके पहले 26 जून 2012 को रामवीर के बड़े भाई सत्यवीर देश की हिफाजत करते हुए पाकिस्तान बार्डर पर शहीद हो चुके हैं। सत्यवीर की शहादत के बाद दुसासन्न दो साल तक उबर नहीं सके। जब तक वह अपने को संभाल पाते कि छोटे बेटे की चीन की सीमा पर हुई मौत ने उसे पूरी तरह से तोड़ दिया।

बेटी को डाक्टर बनाना चाहता था रामवीर
पिता रामवीर ने बेटी को डाक्टर बनाने का सपना देखा था। उन्होंने बच्चों की बेहतर पढाई के लिए उन्हें आगरा शिफ्ट कर दिया था। यहां राहुल बीएड की पढ़ाई कर शिक्षा के क्षेत्र में कैरियर बनाना चाह रहा था। तो वहीं बेटी प्रियंका पापा के सपने को साकार करने के लिए डाक्टरी की पढ़ाई कर रही थी। लेकिन अचानक पिता का साया सिर से उठ जाने से अब बच्चों को अपने कैरियर की चिंता सताने लगी है।
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