औरैया। सदर कोतवाली क्षेत्र की ग्राम पंचायत भीखापुर के मजरा बरपुरी माफी में शिक्षामित्र रामवीर सिंह राजावत की गोलीमार कर हत्या और इसके बाद हमलावर अरुण उर्फ बबलू की पीट-पीट कर हत्या किए जाने के बाद पूरा गांव दहशत में आ गया। घटना के बाद तनाव और बवाल की आशंका को लेकर रात भर पुलिस तैनात रही। बच्चे से लेकर बुजुर्ग और महिलाएं भी खौफ में रहीं। सुबह हुई पर गांव में सन्नाटे के अलावा कुछ नजर नहीं आया।
घटना स्थल विश्राम सिंह के मकान, जिस जगह अरुण का शव मिला (हरपाल सिंह) के मकान से लेकर व शिक्षामित्र रामवीर सिंह के घर के चारों तरफ बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। गांव में आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर पुलिस की नजर थी। किसी भी तरह की चूक न हो इसके लिए गांव की गलियों, मुख्य रास्ते व गांव के आसपास खेतों की पगडंडियों पर भी पुलिस तैनात रही। रात भर पुलिस गांव में घूम कर जायजा लेती रही। इससे ग्रामीण दहशत में नजर आए। देर रात शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने के बाद गांव में सन्नाटा छा गया। दहशत के चलते सुबह भी लोग घरों से नहीं निकले। दोपहर होते ही कुछ चहल-पहल शुरू हुई। मंगलवार को पूरे दिन पुलिस व पीएसी गांव में डेरा डाले रही। सीओ ट्रैफिक सुरेंद्र नाथ, सीओ सदर प्रदीप कुमार कई थानों की पुलिस के साथ गांव में चहल कदमी करते रहे।
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सही वक्त का इंतजार कर रहा था अरुण
औरैया। 20 साल पहले हुई राजीव सेंगर फौजी की हत्या का बदला इस कदर लिया गया कि देखने वालों की रूह कांप गई। सिर में गोली लगने से शिक्षामित्र के आधे सिर के चीथड़े उड़ गए। यह देख चीत्कार मच गई। रामवीर सिंह राजावत गांव में ही प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र थे। करीब 20 साल पहले शिक्षामित्र के भाई कमल उर्फ कमलू ने गांव के अरुण उर्फ बबलू के भाई राजीव सेंगर फौजी की भाई दूज पर हत्या कर दी थी। तभी बबलू ने फौजी भाई की मौत का बदला कमलू के भाई रामवीर से लेने की ठान ली थी। बस इंतजार था सही वक्त और मौके का, जो बबलू को सोमवार रात भीखापुर गांव में भोला प्रसाद की तेरहवीं में मिल गया। एक पंगत उठ चुकी थी तो दूसरी खाना खाने को बैठ रही थी। उठने वाली पंगत में रामवीर भी शामिल थे। अरुण खाना खाने के लिए बैठा था, तभी उसने राइफल से रामवीर के सिर में गोली दाग दी। लोग बचाने के लिए लोग अपनी पत्तलें छोड़कर भाग गए।(संवाद)