उन्नाव। इस बार के मानसून सीजन जून, जुलाई, अगस्त व सितंबर में सामान्य बारिश भी नहीं हुई है। मानसून की बेरुखी से एक तरफ गर्मी लोगों को परेशान किए रही। वहीं दूसरी ओर किसानों ने निजी ट्यूवबेल और नहरों के माध्यम से फसलों की सिंचाई की। सामान्य बारिश न होने से किसानों को फसलों का उत्पादन घटने की आशंका परेशान कर रही है।
सितंबर समाप्त हो गया, लेकिन अच्छी बारिश की राह ताक रहे लोगों को निराशा ही हाथ लगी। आमतौर पर सितंबर में 165.10 मिमी बारिश अच्छी मानी जाती है लेकिन इस बार मात्र 96.66 मिमी. ही पानी बरसा। वहीं अगस्त माह में 246.30 मिमी बारिश के सापेक्ष मात्र 129.50 मिमी ही बारिश हुई। जुलाई व जून में भी यही हालत रही। जुलाई में 262.8 मिमी औसत बारिश होनी चाहिए थी पर मात्र 55 मिमी. ही वर्षा हुई।
जून माह में 67.5 मिमी वर्षा के सापेक्ष 6.67 मिमी ही बारिश हुई थी। पिछले चार माह औसत बारिश न होने से एक तरफ गर्मी कम नहीं हुई। वहीं दूसरी ओर किसान खरीफ फसलों की सिंचाई को लेकर परेशान रहे। खरीफ की मुख्य फसल धान की सिंचाई के लिए साधन संपन्न किसान तो इंजन की मदद लेते रहे, लेकिन सामान्य किसान बारिश के ही इंतजार में रहे। जिला कृषि अधिकारी शशांक चौधरी का कहना है कि भले ही औसत बारिश न हुई हो लेकिन किसानों द्वारा निजी संसाधनों से फसलों की सिंचाई की गई। नहरों में भी पानी रहा। जिससे किसानों के सामने फिलहाल सिंचाई की समस्या नहीं रही।
गंगा का जलस्तर भले ही कम हो गया हो लेकिन अभी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी सूख नहीं पाया है। इससे फसल सर्वे तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। प्राथमिक स्तर के सर्वे में दो तहसीलों में बाढ़ से 567 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
20 सितंबर की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर खतरे का निशान पार कर 113.030 मीटर पर पहुंच गया था। रविवार सुबह जलस्तर 113.150 मीटर पर पहुंचकर फिर घटना शुरू हुआ था। दो दिन में ही बाढ़ का पानी कटरी क्षेत्र के गांवों के चारों ओर भर गया था। घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया था। साथ ही फसलें भी पूरी तरह से जलमग्न हो गई थीं। फौरी तौर पर बांगरमऊ क्षेत्र में बाढ़ से 750 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। जिसमें 300 हेक्टेयर में हरी सब्जियों व परंपरागत धान सहित अन्य फसलें तबाह हुई हैं। इसी प्रकार सफीपुर तहसील में 267 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गईं फसलों को नुकसान हुआ है। एडीएम (वित्त राजस्व) नरेंद्र सिंह ने बताया कि फसल क्षति का सर्वे कराया जा रहा है। जल्द सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।