संवाद न्यूज एजेंसी
दिबियापुर। सिंचाईं विभाग की जमीन पर लगभग 70 वर्षों से बसे दिबियापुर के लगभग 40 लोगों ने उच्च न्यायालय में तीन रिट याचिकाएं दाखिल कींं। इस पर न्यायालय ने 28 फरवरी को सिंचाई विभाग की ओर से जारी नोटिसों पर 28 मार्च से अगले दो सप्ताह तक कोई कार्रवाई न करने के लिए निर्देशित किया है।
दिबियापुर में सिंचाईं विभाग की जमीन पर काबिज 319 लोगों को विभाग ने नोटिस देकर खाली करने के लिए कहा था। इसकी मियाद 19 मार्च को पूरी हो गई थी। हालांकि बाद में प्रशासन ने चुनाव के बाद अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने पर सहमति प्रदान कर दी थी। इस बीच सिंचाई विभाग की जमीन पर किराएदार के रूप में बसे लगभग 40 लोगों ने सिंचाई विभाग से मिले नोटिसों से राहत पाने के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली थी।
लोगों ने तीन याचिकाएं दाखिल कीं थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार याचिकाओं पर उच्च न्यायालय ने अगले दो सप्ताह तक कोई कठोर उपाय न अपनाने के लिए निर्देशित किया है। इसके लिए याचिका कर्ताओं को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ सभी प्रासंगिक दस्तावेजों को संलग्न करके सिंचाई विभाग के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
साथ ही सिंचाई विभाग को निर्देशित किया है कि गुण दोष के आधार पर यथा संभव शीघ्रता से याचिका कर्ताओं की ओर से दर्शाई गई अनुपालन की तारीख से एक महीने की अवधि के भीतर निबटाने एवं निर्णय लें। न्यायालय से आए निर्णय के बाद सिंचाई विभाग की जमीन पर बसे लोगों ने शुक्रवार देर शाम नहर बाजार में एक बैठक की। व्यापारी नेता सुखलाल गुप्ता के अनुसार बैठक में तय किया कि वह लोग सोमवार को जिलाधिकारी से मिलेंगे। इसके साथ ही दिबियापुर नहर पुल के निर्माण के लिए कम तोड़फोड़ करने एवं दिबियापुर के बाहर बाईपास निर्माण की मांग करेंगे।
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उन्हें उच्च न्यायालय में की गई रिट याचिका में मिले निर्देशों की जानकारी हुई है। इसमें सिंचाई विभाग की ओर से फरवरी में दिए गए नोटिसों के मुकाबले याचिका कर्ताओं को दो सप्ताह के अंदर अपना प्रस्तुतिकरण देने का समय दिया गया है। इसमें याचिकाकर्ता साक्ष्यों एवं कागजातों के साथ उन्हें आकर बताएंगे कि उन लोगों को किस अधिकार से सिंचाई विभाग की जमीन पर रहने का हक है। उनको सुनने के बाद ही अग्रिम कार्यवाही करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। याचिका कर्ताओं कीओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्रों का निस्तारण किया जाएगा।
- पीएस पटेल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड औरैया