कंचौसी (औरैया)। करौंदा गांव में दो दर्जन बच्चों को बुखार का इलाज अभी चल ही रहा था कि पड़ोसी गांव पुरवा महिपाल में गुरुवार की रात तेज बुखार से चार साल की बच्ची की मौत हो गई। उसे पांच दिन से बुखार आ रहा था। घरवाले गांव के झोलाछाप से इलाज करा रहे थे।
पुरवा महिपाल निवासी सर्वेश बाथम ने बताया कि पुत्री कनक (4) गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन में पढ़ती थी। 16 सितंबर को उसे बुखार आया। उसे गांव के झोलाछाप को दिखाया। झोलाछाप ने वायरल की बात कहकर जल्दी ठीक होने का भरोसा दिया था। लगातार दवा चल रही थी, लेकिन आराम नहीं मिल रहा था। गुरुवार की रात कनक की मौत हो गई। बच्ची की मौत की जानकारी होते ही शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंच गई है। टीम ने गांव में बुखार पीड़ित लोगों के खून का सैंपल लिए। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में मच्छरों की भरमार है। पूरे कसबे में दवा का छिड़काव नहीं कराया जाता है। गांव में एएनएम भी कभी नहीं आती है। बता दें कि कंचौसी के ही गांव करौंदा में गुरुवार को दो दर्जन बच्चे बुखार से पीड़ित होने पर सीएचसी दिबियापुर में भर्ती कराए गए थे।
सीएमओ डॉ. एके राय ने बताया कि करौंदा गांव में बुखार फैलने की सूचना मिली थी। टीम को भेज दिया गया है। पुरवा महिपाल में भी टीम ने कई लोगों के खून के सैंपल लिए हैं। जल्द ही अधिकारियों की टीम झोलाछापों के खिलाफ अभियान चलाएगी।