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बढ़ रहे डायरिया के मरीज,अस्पताल में नहीं आरएल इंजेक्शन

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औरैया। अस्पताल में डायरिया और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन दवाओं के अभाव में मरीजों का बेहतर इलाज नहीं हो पा रहा है। सबसे जरूरी दवाओं में शामिल रिंगर लैक्टेट इंजेक्शन (आरएल) करीब एक माह से अस्पताल में नहीं है, जबकि उल्टी, दस्त, सड़क हादसे में घायलों को इसे देना डॉक्टर सबसे जरूरी मानते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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इन दिनों मौसमी बीमारियां कहर बरपा रही हैं। सबसे ज्यादा लोग डायरिया, बुखार की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन 300 से अधिक की ओपीडी हो रही है। इसके बाद भी अस्पतालों में बेहतर इलाज के नाम पर दर्द मिल रहा है। शहर के 50 शैया अस्पताल में अप्रैल के अंत से आरएल इंजेक्शन नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक डायरिया, उल्टी, दस्त, सड़क हादसे में घायल समेत अन्य बीमार मरीजों को सबसे पहले इसे देना जरूरी होता है। इसके लिए पिछले दो माह से लगातार शासन से मांग की जा रही है। बावजूद इसके अभी तक आपूर्ति नहीं की गई। अस्पताल में चेहरा देखकर स्टाक में रखा आरएल इंजेक्शन प्रयोग किया जा रहा है। सामान्य मरीजों को बाहर से आरएल लाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
जिला अस्पताल 50 शैया के चीफ फार्मासिस्ट सत्यपाल कटियार ने बताया कि आरएल खत्म होने पर दो मई को पत्र लिखा गया। इसके बाद 27 मई को दो हजार बोतल की मांग करते हुए फिर से पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक किसी भी स्तर से आपूर्ति नहीं हो सकी है।
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सड़क हादसे में घायल होकर पहुंच रहे मरीजों को अस्पताल से टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि दो माह से इंजेक्शन नहीं है। इसकी मांग की जा चुकी है। जो घायल आते हैं, उन्हें बाहर से इंजेक्शन मंगवा कर लगाया जा रहा है।
वर्जन...
अस्पताल आने वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर आरएल का प्रयोग किया जा रहा है। कमी होने पर डिमांड शासन भेजी गई है। जल्द ही आपूर्ति आ जाएगी। डॉ. राजेश मोहन गुप्ता, सीएमएस
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