औरैया। मौसम के बदलाव के चलते इन दिनों वायरल का प्रकोप बढ़ा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ बढ़ गई है, लेकिन बीमारी का सही पता लगाने के लिए अस्पतालों में सीबीसी मशीन से जांचें नहीं हो पा रही हैं। सीबीसी मशीनें बंद पड़ी हैं और जांच के अभाव में मरीजों को भटकना पड़ रहा है।
वायरल और कोरोना के मिलते जुलते लक्षणों के कारण हर कोई जांच कराना चाह रहा है। मरीज, मलेरिया, टाइफाइड के साथ कमजोरी होने पर सीबीसी जांच कराना चाहते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था का आलम है। यहां पर इलाज कम दर्द ज्यादा मिल रहा है।
शहर के 50 शैया और 100 शैया युक्त जिला चिकित्सालय में शुक्रवार को करीब एक हजार व सातों सीएचसी में करीब पांच सौ से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंचे। इन मरीजों में सबसे अधिक बुखार, खांसी-जुकाम, शरीर में दर्द, ठंड लगना, सिर व पेट दर्द की समस्या से पीड़ित थे। कुछ मरीजों ने बुखार व शरीर में कमजोरी होने पर डॉक्टरों से खुद ओपीडी पर्चे में जांच लिखने के लिए बोला।
कुछ जगहों पर मलेरिया व सामान्य जांचें हुईं। मगर दोनों जिला अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर सीबीसी जांचें बंद रही। इसके कारण बुखार से कमजोरी महसूस कर रहे मरीज प्लेटलेट्स संबंधी जांच नहीं करा सके और उन्हें मजबूरन डॉक्टर से दवा लिखवाकर लौटना पड़ा।
नहीं सही हो सकी सीबीसी मशीन
शहर के 50 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय के लैब में रखी सीबीसी मशीन का तार बुधवार रात चूहों ने कुतर दिया था। इससे सीबीसी जांच नहीं हो पा रही है। शुक्रवार को भी जांच नहीं होने पर मरीजों को प्राइवेट लैब की तरफ रुख करना पड़ा। सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्ता ने बताया कि सीबीसी मशीन को सही कराने के लिए लखनऊ से इंजीनियर को बुलाया गया है। इसके अलावा अस्पताल में अन्य जांचें हो रही हैं।
100 शैया में नहीं है सीबीसी मशीन
जिले का चिचौली स्थित 100 शैया कहने को तो जिला चिकित्सालय है, पर यहां पर मरीजों की सीबीसी जांच नहीं होती है। यहां के मरीजों को सीबीसी जांच के लिए 50 शैया अस्पताल व समीप की सीएचसी या प्राइवेट लैबों में जाना पड़ता है। जिले के प्रमुख सरकारी अस्पताल में सीबीसी जांच का न होना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का नतीजा दर्शाता है। सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि अस्पताल में सीबीसी मशीन की मांग शासन से की गई है। मिलने पर जांचें की जाएगी।
500 से 1000 रुपये में हो रही जांच
सरकारी अस्पतालों में खून से संबंधित कई जांचें न होने पर निजी पैथालॉजी में जांच कराने की होड़ मची हुई है। जांच के लिए 500 से लेकर 1000 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। बताया जा रहा कि कुछ अस्पतालों के कर्मचारी भी गिने चुनी पैथालॉजी पर ही मरीजों को भेज कर जांच करा रहे हैं, इसके पीछे भी कमीशनबाजी होना बताया जा रहा है।
अस्पताल में खांसी-जुकाम के मरीज देखते डॉक्टर। संवाद- फोटो : AURAIYA
अयाना अस्पताल में रखी सीबीसी मशीन। संवाद- फोटो : AURAIYA