माता पिता व भाई के साथ बैठा विवेक तिवारी
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मम्मी दरवाजा खोलो। यह आवाज जब मां के कानों में पड़ी तो उन्होंने दौड़कर दरवाजा खोला। सामने खड़े युवक को विक्की विक्की कहकर गले से लगा लिया। मगर पिता व भाई चेहरे में दाढ़ी रखे युवक को पहचान नही पाए। काफी देर बाद जब पहचाना तो हर किसी की आंखें छलक उठी। बुधवार रात क्षेत्र के गांव शहबदिया में प्रेमचंद्र तिवारी का सबसे छोटा बेटा विवेक उर्फ विक्की पहुंचा।
वह 8 दिसंबर 2010 को घर से अचानक लापता हो गया। परिजनों ने कोतवाली में गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी पर उसका पता नहीं था। बुधवार की रात विक्की के घर आने पर गांव वालों की भी भीड़ लग गई। विक्की ने बताया कि वह जब यहां से गया तो पता नहीं क्या हुआ। इलाहाबाद स्टेशन पर बेहोश पड़ा मिला तो एक युवक उसे फतेहपुर ले गया। वहां बरार पोस्ट कोट गांव निवासी रामवली को सौंप दिया। रामवली उसे कानपुर के टीपीनगर स्थित घर ले आए। वह एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में मैनेजरी का काम करते थे।
उसे घर के बारे में कुछ याद नहीं था। दो साल पहले उनका निधन हो गया। पिछले सप्ताह से उसे सपने में घर व पास का मंदिर दिखाई पड़ा तो वह रोडवेज बस में बैठकर गांव आ गया। वह उन्हीं लोगों के साथ काम करता था। जानकारी मिलने पर उसके रिश्तेदार भी पहुंच गए। पिता प्रेमचंद्र तिवारी और मां मुन्नी देवी ने कहा कि मुझे भगवान पर पूरा विश्वास था कि उसका बेटा जरूर आएगा।