बिधूना। तहसील क्षेत्र के लोगों के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम से सात करोड़ की लागत से नेत्र चिकित्सालय बना है, लेकिन यहां जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनें व अन्य उपकरण नहींंंं हैं।
ऐसे में डॉक्टर, सर्जन व अन्य स्टाफ की तैनाती के बाद भी लोगों को बेहतर इलाज नहींंंं मिल पा रहा है। कस्बा बिधूना स्थित 50 शैय्या नेत्र चिकित्सालय में स्टाफ की बात करें तो यहां पर अधीक्षक डॉ. धीरेन्द्र सक्सेना, सर्जन जयकिशन, फार्मासिस्ट प्रवेश त्रिपाठी, नेत्र परीक्षण अधिकारी प्रवीन सक्सेना व नर्स कुमुद समेत अन्य स्टाफ तैनात है।
यहां सरकार ने उपकरण खरीदने के लिए एक करोड़ 22 लाख रुपये का बजट भी दिया है। बताया जा रहा है कि 22 लाख से तत्कालीन सीएमओ सुनील कुमार वर्मा ने कुर्सी- मेज, बेड व कुछ अन्य उपकरण की खरीदारी की थी, लेकिन आधुनिक मशीनें न होने से ऑपरेशन आदि की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
नेत्र चिकित्सालय में प्रतिदिन 15 से 20 तक मरीज पहुंच रहे हैं। मगर उन्हें वहां पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीज गोविंद प्रताप सिंह ने बताया कि एक साल से उपकरण आने का इंतजार हो रहा है। अवधेश मिश्रा ने कहा कि उपकरण न होने से बेटी की आंख के इलाज के लिए चित्रकूट ले जाना पड़ा। उपकरणों के अभाव में मरीज कानपुर, आगरा ग्वालियर व चित्रकूट आदि जगहों पर जाकर इलाज करा रहे हैं।
उधर, नेत्र चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. धीरेंद्र कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन द्वारा मशीनों व उपकरणों की खरीद की जा रही है।