औरैया। बिधूना तहसील क्षेत्र के लुधपुरा गांव में वर्ष 1995 में हुए आवास आवंटन के लिए करीब 27 साल बाद वाद दाखिल किया गया। अपर जिलाधिकारी एमपी सिंह ने वाद को कालबाधित और पोषणीय न मानते हुए निरस्त कर दिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत आवंटन की तारीख से तीन वर्ष के भीतर आवेदन किए जाने की समय सीमा का हवाला दिया।
ग्राम सराय प्रथम निवासी बलराम सिंह ने निरंजन सिंह व प्राग सिंह को ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और एसडीएम की स्वीकृति से किए गए आवास आवंटन के खिलाफ 13 जून 2022 को वाद दाखिल किया था। आवंटन 24 फरवरी 1995 को स्वीकृत हुआ था। प्रतिवादी निरंजन सिंह की ओर से वाद को कालबाधित बताते हुए पहले इसी बिंदु पर सुनवाई की मांग की गई।
वादी ने दावा किया था कि उसे आवंटन की जानकारी एक जून 2022 को तब हुई, जब लेखपाल आवंटित प्लॉटों की पैमाइश के लिए आया था। कोर्ट ने वादी की आपत्ति में किए गए उस उल्लेख को महत्वपूर्ण माना, जिसमें वर्ष 1997 में आवंटन को लेकर व्यवहार न्यायालय में वाद दाखिल किए जाने की बात कही गई थी।
इससे न्यायालय ने माना कि वादी को आवंटन की जानकारी पहले से थी। न्यायालय ने कहा कि अधिवक्ता की ओर से सही सलाह न मिलने के कारण वाद दाखिल करने में हुई देरी को संतोषजनक कारण नहीं माना जा सकता। आवंटन की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में करीब 27 वर्ष बाद दाखिल वाद अति कालबाधित होने के कारण पोषणीय नहीं है।
अपर जिलाधिकारी ने 10 जुलाई 2024 को खुले न्यायालय में आदेश सुनाते हुए बलराम सिंह का दावा निरस्त कर दिया। साथ ही आवंटन संबंधी पत्रावली तहसीलदार बिधूना को भेजने और आवश्यक कार्रवाई के बाद पत्रावली दाखिल दफ्तर करने के निर्देश दिए।