उत्तर भारत में मंगलवार को आए भूकंप के बाद बारिश से पहले से अपनी बदकिस्मती पर रो रहे अन्नदाता और बर्बाद हो गए हैं। बुधवार को हुई बारिश ने किसानों के खेतों में कटे गेहूं के गट्ठरों के साथ भूसे भिगोकर उनकी रही सही उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बारिश के बाद अमर उजाला ने पड़ताल की तो स्थिति काफी नाजुक दिखाई दी
।
मार्च- अप्रैल की बारिश से जिले के 841 गांवों के 55816 किसानों की चना, सरसों, अरहर व गेहूं की फसलों को नष्ट कर दिया था। इससे किसानों की 60 से 75 फीसदी तक गेहूं फसल प्रभावित हुई थी। इन दिनों किसानों की बची-खुची गेहूं फसल को थ्रेसिंग के लिए खेतों पर पड़ी हुई है। वहीं इंतजाम न होने से किसानों का भूसा भी खेतों पर पड़ा है।
मंगलवार को भूकंप आने के बाद अचानक बदले मौसम के चलते बुधवार को बारिश हुई। आज हुई तकरीबन 25 मिनट की बारिश ने किसानों की रही सही उम्मीदों पर तो पानी फेरा ही। वहीं जानवरों के लिए भूसे की किल्लत पैदा कर दी है।
बारिश से ज्यादातर किसानों का खेतों पर पड़ा भूसा और खेतों पर थ्रेसिंग के लिए पड़े गेहूं के गट्ठर भीग गए हैं। गेहूं के भीगे गट्ठरों के देख किसान सदमे जैसी हालत में नजर आ रहे हैं।
इधर बारिश के बाद फसलों का अमर उजाला ने ग्राम बहादुरपुर व शहबदिया का जायजा लिया तो खेतों पर भीगे गेहूं गट्ठर और भूसा का ढेर खेताें पर पड़े दिखाई दिए।
इधर उप कृषि निदेशक डा. बनारसी दास यादव ने बताया कि 90 फीसदी किसानों ने अपने गेहूं फसल को सुरक्षित कर लिया है। आज की बारिश से खेतों पर पड़ी गेहूं फसल व भूसे का मामूली नुकसान जरूर हुआ है।
उर्द फसल को फायदा- औरैया। बुधवार को हुई बारिश से जहां गेहूं किसानों को मामूली नुकसान हुआ है। वहीं आज हुई बारिश से उर्द किसान गद्गद हैं। आज की बारिश ने एक सिंचाई कर चुके किसानों की दूसरी सिंचाई की चिंता को समाप्त किया है।