भीषण तपिश, भारी उमस और गर्मी से पूरा शहर बेहाल हो रहा है। सड़कें सूनी हैं लोग घरों में कैद हैं। यह हालात हैं शहरवासियों के। गर्मी का विकराल रूप देख लोग परेशान दिख रहे हैं। गुरुवार को गर्मी का प्रकोप जारी रहा और पारा 44.6 के पार पहुंच गया।
सूरज के रौद्ध रूप ने आम जनमानस को झकझोर दिया है। सूर्य देवता के तीखे तेवरों के आगे शहरवासी झुलसते नजर आ रहे हैं। एक तो गर्मी ऊपर से भीषण उमस के चलते लोग बेचैन दिखाई पड़ रहे हैं। सुबह से तेज धूप और गर्म हवा मानो आसमान से कहर बरपा रही हो।
सुबह 10 बजे बाद से व्यक्ति अपने घरों में कैद हो जाते हैं। वहीं हमेशा व्यस्त रहने वाले चौराहे सुनसान नजर आए। दोपहर के समय दहकती धरती, आसमान से बरसते अंगारे हर किसी को झुलसाते रहे।
गुरुवार को पारा 44.6 के पार पहुंच गया। सूनी सड़कें भी गर्मी का अहसास कराती नजर आईं। तन झुलसा देने वाली भीषण गर्मी से बचने को लोग तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहे हैं।
पंखे और कूलर में दिखाई दे रही गर्मी -औरैया। ऐसी भीषण गर्मी में कूलर की हवा ले पाना, हर किसी के लिए आसान नहीं है। गर्मी को देखते हुए कूलर के दाम तेजी से बढ़े हैं। वहीं पंखों के दामों में भी बढ़ोत्तरी हुई है। कूलरों के दामों 300 से 500 रुपये तक का इजाफा हुआ है। वहीं पंखे के दाम लगभग 200 रुपये उछले हैं।
ठंडी हवा को अब कूलर में खस भरना आसान नहीं है। इस बार खस 80 से 170 रुपये प्रति किलो है और कूलर की भरवाई 170 रुपये है। यह खस बाजार में दो प्रकार की बेची जा रही है। खस विक्रेता अनूप कुमार ने बताया कि यह खस गाजियाबाद, मुरादाबाद, फरीदाबाद व हापुड़ से मंगाई जाती है।
कहा कि भाड़ा पिछली बार 16 प्रतिशत लगता था, लेकिन इस बार 18 प्रतिशत लग रहा है। इसके बाद लेबर चार्ज 250 रुपये लगता है। महंगाई के बावजूद 70 से 85 रुपये तक लोग खस भरवाने को पहुंचते हैं। वहीं पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार पंखाें व कूलराें में भी खासी बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन गर्मी के चलते महंगाई का कोई असर नहीं पड़ रहा है।